कुंदन कुमार/ पटना। बिहार की राजनीतिक संरचना में एक ऐतिहासिक विस्तार होने जा रहा है। मई के महीने में संसद का विशेष सत्र बुलाकर परिसीमन कानून में संशोधन की तैयारी है। इसके प्रभावी होते ही बिहार में लोकसभा सीटों की संख्या मौजूदा 40 से बढ़कर 60 और विधानसभा सीटों की संख्या 243 से बढ़कर 365 होने की प्रबल संभावना है।
स्व-गणना बनेगी तकनीकी आधार
इस बड़े बदलाव की तकनीकी प्रक्रिया 17 अप्रैल से शुरू होने वाली है। चूंकि 2026 की जनगणना के अंतिम आंकड़े 2028 से पहले आने की उम्मीद कम है, इसलिए परिसीमन आयोग स्व-गणना के प्रारंभिक डेटा को ही सीटों के पुनर्गठन का मुख्य आधार बना सकता है। यह डेटा ही नए निर्वाचन क्षेत्रों की सीमाओं का निर्धारण करेगा।
नारी शक्ति वंदन अधिनियम का प्रभाव
केंद्र सरकार के रुख के अनुसार, नारी शक्ति वंदन अधिनियम के तहत महिलाओं के लिए आरक्षित होने वाली एक-तिहाई सीटें मौजूदा सीटों के अतिरिक्त जोड़ी जाएंगी। इस गणित के हिसाब से लोकसभा की 53 और विधानसभा की 32 सीटें बढ़ना लगभग तय माना जा रहा है। शेष सीटों का विस्तार बढ़ती आबादी की मांगों और क्षेत्रीय असंतुलन को दूर करने के आधार पर किया जाएगा।
राज्यसभा और विधान परिषद में भी विस्तार
सीटों की यह बढ़ोतरी केवल निचले सदनों तक सीमित नहीं रहेगी। उच्च सदन यानी राज्यसभा और विधान परिषद की सीटों में भी इसी अनुपात में वृद्धि की जाएगी। यह कदम बिहार जैसे बड़ी आबादी वाले राज्य में बेहतर प्रतिनिधित्व और प्रशासनिक सुगमता सुनिश्चित करने के उद्देश्य से उठाया जा रहा है।
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