जैन कुकिंग में बिना प्याज, लहसुन और रूट वेजिटेबल्स के स्वाद और टेक्सचर बनाए रखना एक आर्ट है. बहुत से लोग इसी तरह का खान खाते हैं या फिर पूजा कि लिए बनाते हैं तो भी बिना प्याज लहसुन का ही खाना बनाते हैं और हम अक्सर यही सोचते हैं की इस तरह से स्वादिष्ट सब्जी बना पाना पॉसिबल नहीं है. लेकिन कुछ स्मार्ट तकनीकों और छोटे-छोटे हैक्स से खाना उतना ही स्वादिष्ट (कभी-कभी उससे भी ज्यादा!) बनाया जा सकता है. आइए जानते हैं क्या हैं वो टिप्स.

हींग और अदरक का कमाल

प्याज-लहसुन की कमी को हींग (asafoetida) से काफी हद तक पूरा किया जा सकता है. घी या तेल में हल्की सी हींग डालते ही एक गहरा उमामी फ्लेवर मिलता है. अदरक (अगर आपकी जैन परंपरा में अनुमति हो) ताजगी और हल्की तीखापन देता है.

मसालों की सही लेयरिंग

जीरा, राई, सौंफ, करी पत्ता जैसे तड़के से शुरुआत करें. फिर धनिया पाउडर, हल्दी, लाल मिर्च जैसे सूखे मसाले डालें. अंत में गरम मसाला या किचन किंग मसाला डालकर फ्लेवर को “फिनिश” दें. इससे बिना प्याज-लहसुन के भी डिश में गहराई (depth) आती है.

टमाटर और दही से ग्रेवी का बेस

टमाटर प्यूरी को अच्छे से पकाकर उसकी खटास कम करें. दही या काजू पेस्ट मिलाने से क्रीमी टेक्सचर आता है. कद्दूकस किया हुआ लौकी या तोरी भी ग्रेवी को गाढ़ा बना सकता है.

नट्स और बीज का इस्तेमाल

काजू, बादाम या खसखस का पेस्ट डालने से रिचनेस और बॉडी मिलती है. तिल या मूंगफली भी बढ़िया स्वाद और टेक्सचर देते हैं.

संतुलित खट्टापन और मिठास

अमचूर, इमली या नींबू से खट्टापन जोड़ें. थोड़ी सी चीनी या गुड़ डालने से फ्लेवर बैलेंस हो जाता है.

सही कुकिंग टेक्नीक

मसालों को “भूनना” बहुत जरूरी है – यही फ्लेवर बनाता है. धीमी आंच पर पकाने से स्वाद अच्छे से डेवलप होता है. थोड़ा घी अंत में डालने से डिश और भी aromatic हो जाती है.

टेक्सचर के लिए विकल्प

पनीर, सोया चंक्स या दालों का इस्तेमाल करें. शिमला मिर्च, तोरी, टिंडा जैसी सब्जियाँ सही कट और कुकिंग से शानदार टेक्सचर देती हैं.