कुंदन कुमार/नई दिल्ली/ पटना। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) सोमवार को अपना स्थापना दिवस मना रही है। इस विशेष अवसर पर पार्टी के उन करोड़ों समर्पित कार्यकर्ताओं को नमन किया जा रहा है, जिनकी अटूट निष्ठा और अनवरत परिश्रम ने इसे आज विश्व का सबसे बड़ा राजनीतिक संगठन बनाया है। यह यात्रा केवल सत्ता की नही बल्कि राष्ट्र पुनर्निर्माण के प्रति अटूट समर्पण की गाथा है।
त्याग और तपस्या का ऐतिहासिक आधार
बीजेपी की नींव उन आदर्शों पर टिकी है जिसके लिए जनसंघ के काल से ही असंख्य कार्यकर्ताओं ने अपना सर्वस्व न्यौछावर किया। डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के बलिदान और पंडित दीनदयाल उपाध्याय के एकात्म मानववाद ने पार्टी को वह वैचारिक अधिष्ठान दिया जिस पर आज एक भव्य भारत की संरचना हो रही है। कार्यकर्ताओं का यह त्याग ही है कि दीपक की लौ आज एक कमल के रूप में पूरे विश्व में अपनी आभा बिखेर रही है।
अंत्योदय से सर्वोदय: मोदी युग में स्वप्न का साकार होना
पंडित दीनदयाल उपाध्याय जी ने जिस अंत्योदय (अंतिम व्यक्ति का उदय) का स्वप्न देखा था वह आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व में धरातल पर उतर रहा है। गरीब कल्याण की योजनाओं, डिजिटल क्रांति और बुनियादी ढांचे के विकास के माध्यम से समाज के अंतिम छोर पर खड़े व्यक्ति को मुख्यधारा से जोड़ा जा रहा है। मोदी जी के नेतृत्व में भारत आज वैश्विक पटल पर एक निर्णायक शक्ति बनकर उभरा है।
राष्ट्र प्रथम: विकसित भारत का संकल्प
स्थापना दिवस का यह अवसर मात्र उत्सव नहीं बल्कि संकल्प की पुनरावृत्ति है। राष्ट्र प्रथम के मूल मंत्र को आत्मसात करते हुए पार्टी अब विकसित भारत @2047 के लक्ष्य की ओर अग्रसर है। भाजपा के हर कार्यकर्ता के लिए यह समय अपनी ऊर्जा को राष्ट्र निर्माण में झोंकने और एक आत्मनिर्भर व सशक्त भारत के निर्माण हेतु स्वयं को समर्पित करने का है।
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