सुरेश पांडेय, सिंगरौली। मध्य प्रदेश सरकार आदिवासी कल्याण और जल जीवन मिशन के बड़े-बड़े दावे करती है, लेकिन सिंगरौली जिले के चितरंगी विकासखंड में एक गांव की तस्वीर इन दावों को चूर-चूर कर रही है। ग्राम पंचायत कपुरदेई में आदिवासी परिवार भीषण गर्मी के बीच नाले में गड्ढा खोदकर दूषित पानी पीने को मजबूर हैं। चितरंगी विकासखंड अंतर्गत ग्राम पंचायत कपुरदेई की यह तस्वीर बेहद चिंताजनक है। जहां आदिवासी समुदाय के लोग आज भी मूलभूत सुविधा — स्वच्छ पेयजल से वंचित हैं। जलस्रोतों के सूख जाने के बाद ग्रामीणों को नाले में गड्ढे खोदकर पानी निकालना पड़ रहा है। यही गंदा और दूषित पानी वे पीने, खाने और घरेलू कामों के लिए इस्तेमाल कर रहे हैं।

ग्रामीणों की व्यथा

ग्रामीणों का कहना है कि उन्होंने कई बार पंचायत, प्रशासन और स्थानीय जनप्रतिनिधियों को शिकायत की, लेकिन अब तक कोई स्थायी समाधान नहीं निकाला गया। क्षेत्र की विधायक को भी समस्या से अवगत कराया गया, फिर भी कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। स्थानीय लोगों का आरोप है-“हम महीनों से पानी की तंगी झेल रहे हैं। नाला का गंदा पानी पीने से गांव में बीमारियां फैल रही हैं। बच्चे, महिलाएं और बुजुर्ग सबसे ज्यादा प्रभावित हो रहे हैं।”

सवाल विकास पर

जब मध्य प्रदेश सरकार आदिवासी इलाकों में विकास, जल जीवन मिशन और स्वच्छ पेयजल पहुंचाने का दावा कर रही है, तो कपुरदेई जैसे गांव आज भी इस बुनियादी सुविधा से क्यों वंचित हैं? लाखों रुपये की योजनाओं के बावजूद जमीनी हकीकत क्यों अलग है? कपुरदेई के आदिवासी परिवारों की यह पीड़ा विकास मॉडल की असल तस्वीर पेश करती है। अब देखना होगा कि जिला प्रशासन, पंचायत और जनप्रतिनिधि इस समस्या का तुरंत समाधान निकालते हैं या नहीं। ग्रामीणों की मांग है कि शीघ्र स्वच्छ पेयजल की स्थायी व्यवस्था की जाए, वरना स्थिति और बिगड़ सकती है।

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