महाराष्ट्र की देवेंद्र फडनविस सरकार जल्द ही पुजारियों को सुरक्षा गार्डों, मराठी कर्मचारियों और अस्थायी श्रमिकों की तरह एक अलग और समान दर्जा देने वाली है. इसके लिए मंदिरों में पारंपरिक पुजारियों को निश्चित वेतन और कानूनी सुरक्षा भी दी जाएगी. इतना ही नहीं योजना के अनुसार, राज्य सरकार पुजारियों ने अलग-अलग श्रेणियों में बांटेगी.
सरकार की नीति क्या है खास ?
जानकारी के मुताबिक, फडणवीस राज्य सरकार जल्द ही एक इस बड़ी नीति पर काम शुरू करने जा रही है. जिसके अनुसार राज्य स्थित मंदिरों के पारंपरिक पुजारियों को भी सुरक्षा गार्डों, मराठी कर्मचारियों और दिहाड़ी मजदूरों की तरह एक अलग और समान दर्जा दिया जाएगा. इसका उद्देश्य जारियों को आर्थिक स्थिरता करने के साथ ही सुरक्षा प्रदान करना है जिसके लिए इस नीति पर कम किया जा रहा है. इस नीति के तहत उन्हें एक निश्चित वेतन और कानूनी सुरक्षा दी जाएगी. इस नीति को लेकर राज्य में काफी चर्चा शुरू हो गई है. इसके विवादास्पद होने की संभावना है.
राहत एवं पुनर्वास राज्य मंत्री ने दी खास जानकारी
जानकारी के अनुसार राज्य सरकार जल्द ही राज्य के अलग-अलग मंदिरों के पुजारियों के लिए एक व्यापक नीति की घोषणा कर सकती है. इसी को लेकर एक बैठक में राहत एवं पुनर्वास राज्य मंत्री आशीष जायसवाल ने जानकारी देते हुए कहा कि पुजारी पीढ़ियों से मंदिरों में सेवा कर रहे हैं. सरकार के संज्ञान में आया है कि उन्हें निश्चित वेतन और सुरक्षा प्राप्त नहीं है. इन पुजारियों के अधिकारों की रक्षा और उनके सम्मानजनक जीवन यापन को सुनिश्चित करने के लिए ठोस कदम उठाए जाएंगे. इस संबंध में जल्द ही एक नीति की घोषणा की जाएगी.
बैठक में कौन-कौन रहे मोजूद, किन मुद्दों पर हुई चर्चा ?
इस बैठक में चैरिटी कमिश्नर एस.एस. कलोटी, विधि एवं न्याय विभाग के अवर सचिव, उप सचिव, गुरव समाज के सलाहकार मुकुंद अगलवे, कार्यकारी राष्ट्रीय अध्यक्ष विजय शिंदे, देवस्थान समिति के राज्य अध्यक्ष धनंजय डेयर, महासचिव रंगनाथ गुरव, समीर गुरव और विभिन्न प्रतिनिधि उपस्थित थे.
बैठक में इन बिंदुओं पर दिया गया जोर…
- मंदिरों से प्राप्त आय के पारदर्शी वितरण और पुजारियों के पारिश्रमिक को निर्धारित करने पर विशेष जोर दिया जाएगा.
- सुरक्षा गार्डों, मराठी कर्मचारियों और गिग वर्करों की तरह, पुजारियों को भी कानूनी संरक्षण और वित्तीय स्थिरता की गारंटी दी जाएगी.
- मंदिरों के प्रकार, मौजूदा प्रक्रियाओं और अदालती फैसलों का अध्ययन करके मंदिरों को ए, बी और सी श्रेणियों में वर्गीकृत करने की योजना है.
- मंदिरों की संपत्ति, भूमि और आय के प्रबंधन के लिए एक अलग बंदोबस्ती ट्रस्ट स्थापित करने का प्रस्ताव विचाराधीन है.
Follow the LALLURAM.COM MP channel on WhatsApp
https://whatsapp.com/channel/0029Va6fzuULSmbeNxuA9j0m
- छत्तीसगढ़ की खबरें पढ़ने यहां क्लिक करें
- उत्तर प्रदेश की खबरें पढ़ने यहां क्लिक करें
- लल्लूराम डॉट कॉम की खबरें English में पढ़ने यहां क्लिक करें
- खेल की खबरें पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें
- मनोरंजन की बड़ी खबरें पढ़ने के लिए करें क्लिक

