कारगिल युद्ध के वीर योद्धा कर्नल सोनम वांगचुक का शुक्रवार सुबह लेह में आकस्मिक निधन हो गया। उनके निधन की खबर से पूरे लद्दाख क्षेत्र सहित देशभर में शोक की लहर दौड़ गई है। वे महावीर चक्र से सम्मानित एक बहादुर सैन्य अधिकारी थे, जिन्होंने अपनी वीरता और नेतृत्व से इतिहास रचा। उनके निधन से पूरे देश में शोक की लहर है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और भारतीय सेना ने उन्हें श्रद्धांजलि दी है। बता दें कि कर्नल वांगचुक ने कारगिल युद्ध के दौरान बेहद विषम परिस्थितियों में अपनी टीम को संभाला था और दुश्मन पर जवाबी हमला करके उसके सैनिकों को मार गिराया था।
‘एक साहसी और कर्तव्यनिष्ठ सैनिक थे कर्नल वांगचुक’
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने सोशल मीडिया पर शोक व्यक्त करते हुए कर्नल वांगचुक को एक साहसी और कर्तव्यनिष्ठ सैनिक बताया। उन्होंने कहा कि वे लद्दाख का गौरव थे और उन्होंने हमेशा देश की सेवा को प्राथमिकता दी। सिंह ने कहा कि ऑपरेशन विजय के दौरान दुर्गम ऊंचाई वाले इलाकों में उनका नेतृत्व और साहस सैनिकों के लिए प्रेरणा बना।
‘उनका जीवन साहस, सेवा और एकता का प्रतीक था’
भारतीय सेना ने भी कर्नल वांगचुक के निधन पर गहरा दुख जताया और उनके परिवार के प्रति संवेदना व्यक्त की। सेना ने उन्हें एक बहादुर सैनिक, समर्पित नेता और लद्दाख का सच्चा बेटा बताया, जिनका जीवन साहस, सेवा और एकता का प्रतीक था। सेना ने उनके वीरता पुरस्कार के संदर्भ में बताया कि 30 मई 1999 को, उस समय मेजर रहे सोनम वांगचुक ऑपरेशन विजय के दौरान बाटालिक सेक्टर में एक सैन्य टुकड़ी का नेतृत्व कर रहे थे। उन्होंने 18,000 फीट की ऊंचाई पर बतालिक सेक्टर के चोरबत ला क्षेत्र में एक साहसिक अभियान का नेतृत्व करते हुए दुश्मन से एक महत्वपूर्ण चोटी को दोबारा हासिल किया। यह ऑपरेशन विजय की शुरुआती और निर्णायक सफलताओं में गिना जाता है।
विषम परिस्थितियों में दुश्मन के छुड़ा दिए थे छक्के
इस दौरान दुश्मन ने अचानक हमला कर दिया, जिसमें लद्दाख स्काउट्स के एक जवान की मौत हो गई। कठिन परिस्थिति में भी मेजर वांगचुक ने अपनी टीम को संभाला और बहादुरी दिखाते हुए जवाबी हमला किया। उन्होंने दुश्मन के ठिकाने पर हमला कर दुश्मन देश के 2 सैनिकों को मार गिराया और भारी मात्रा में हथियार और गोला-बारूद बरामद किया। उनकी इस अदम्य वीरता के लिए उन्हें महावीर चक्र से सम्मानित किया गया, जो भारत का दूसरा सबसे बड़ा सैन्य सम्मान है।
जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने भी कर्नल वांगचुक को दी श्रद्धांजलि
लेह स्थित फायर एंड फ्यूरी कॉर्प्स ने भी उनके निधन पर शोक जताते हुए कहा कि कर्नल वांगचुक का साहस, नेतृत्व और देशभक्ति हमेशा याद रखी जाएगी। उनका योगदान कठिनतम परिस्थितियों में देश की जीत में बेहद महत्वपूर्ण रहा। भारतीय सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी और सभी सैन्य अधिकारियों ने भी उन्हें श्रद्धांजलि देते हुए कहा कि उनका जीवन आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा बना रहेगा।
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