कर्नल श्रीकांत पुरोहित के प्रमोशन पर महाराष्ट्र सपा अध्यक्ष अबू आजमी ने सवाल उठाए हैं. उन्होंने कहा कि बहुमत होने के बावजूद देश का शासन संविधान के अनुसार चलना चाहिए, मनमानी से नहीं. आजमी ने पुरोहित मामले में सरकारी वकील के नरम रुख के दबाव और गवाहों के मुकरने का हवाला दिया. उन्होंने कहा कि कर्नल पुरोहित और दूसरे लोगों से जुड़े मामले में सरकारी वकील ने भी यह माना था कि उनके प्रति नरम रुख अपनाने का दबाव था. कई गवाह अपने बयानों से मुकर गए, फिर भी कोई सख्त कार्रवाई नहीं की गई. उन्होंने बताया कि नतीजतन, सभी आरोपियों को बरी कर दिया गया.
कर्नल श्रीकांत पुरोहित को ब्रिगेडियर के पद पर प्रोमोशन मिल गया है. इसको लेकर विवाद शुरू हो गया है. महाराष्ट्र समाजवादी पार्टी के नेता अबू आसिम आजमी ने प्रतिक्रिया दी है.
भारतीय सेना ने कर्नल श्रीकांत पुरोहित को ब्रिगेडियर के पद पर पदोन्नति के लिए मंजूरी दे दी है. यह उनके करियर की प्रगति और 2008 के मालेगांव विस्फोट मामले में बरी कर दिया था. इस मंजूरी के बाद विवाद शुरू हो गया है. इस बीच महाराष्ट्र समाजवादी पार्टी के नेता अबू आसिम आजमी ने प्रतिक्रिया दी है.
अबू आसिम ने कहा कि आम जनता ये जानना चाहती है कि जब ट्रेन ब्लास्ट के लोग 19 साल बाद छूटे तो सरकार ने अपील की, और इस मुकदमें को फिर से देखने को कहा. वहीं जिस ब्लास्ट में कर्नल पुरोहित, साध्वी प्रज्ञा जैसे लोग हैं उस मामले में अपील क्यों नहीं की गई. उन्होंने कहा कि हो सकता है मुझे ज्ञान कम हो लेकिन, इस पर सीएम और केंद्र सरकार से स्टेटमेंट में बता दिया जाए कि अपील क्यों नहीं की गई.
अबू आसिम आजमी ने श्रीकांत पुरोहित को प्रोमोशन मिलने पर कहा कि मालेगांव ब्लास्ट केस में उनकी सरकारी वकील थीं उनका बयान आया था कि उनके ऊपर दवाब था. उन्होंने बताया था कि इस केस के अंदर आरोपी के लिए हमदर्दी करो.
सपा नेता ने कहा कि अगर आरोपी के साथ वकील ही हमदर्दी करेगा तो फिर सजा किसको होगी. इसमें 30-40 गवाह विरोधी हो गए. जो विरोधी होते हैं उनको बुलाया जाता है लेकिन नहीं बुलाया गया. इसमें कुछ गवाहों ने मजिस्ट्रेट के सामने गवाही दी थी कि उन्हें भी नहीं बुलाया गया और सब छूट गए.
अबू आजमी ने अपील न करने पर सरकार पर आरोप लगाए हैं. उन्होंने कहा कि क्या इस केस में इसलिए अपील नहीं की गई क्योंकि आरोपी मुस्लिम नहीं थे.
अबू आजमी ने पुणे के मिलिट्री मैन अनवर अली का जिक्र करते हुए कहा कि जेल से निकलने के बाद उन्हें कोई वेतन नहीं मिला और न ही उन्हें उनकी नौकरी वापस मिली. वहीं कर्नल श्रीकांत पुरोहित को ब्रिगेडियर के पद पर पदोन्नति मिल गया. यहां पर दो तरह का कानून चल रहा है. यह देश संविधान से चलेगा या मनमानी से चलेगा. यह सवाल हम सरकार से पूछते हैं.
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