Sirohi Fake Death Certificate Case: राजस्थान के सिरोही जिले में फर्जी जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्र जारी करने वाले एक बड़े गिरोह का भंडाफोड़ हुआ है। इस मामले में गाज गिरी है 7 ग्राम विकास अधिकारियों (VDO) पर, जिन्हें जिला कलेक्टर ने तत्काल प्रभाव से सस्पेंड कर दिया है। आरोप है कि बीमा क्लेम की मोटी रकम हड़पने के लिए इन अधिकारियों ने मिलकर फर्जी प्रमाण पत्रों की फैक्ट्री खोल रखी थी।

बीमा क्लेम के लिए मुर्दा बनाने का खेल

दरअसल, यह पूरा मामला भ्रष्टाचार और जालसाजी का है। सूत्रों ने बताया कि आबू रोड की विभिन्न पंचायतों में सैकड़ों की संख्या में फर्जी मृत्यु प्रमाण पत्र सिर्फ इसलिए जारी किए गए ताकि बीमा कंपनियों से क्लेम उठाया जा सके। गौरतलब है कि निचलागढ़ में 154 फर्जी जन्म और 40 फर्जी मृत्यु प्रमाण पत्र मिले हैं। उपलागढ़ में 95, सियावा में 24 और खडात में 42 फर्जी प्रमाण पत्र सामने आए हैं। इन सभी दस्तावेजों पर ग्राम विकास अधिकारियों के डिजिटल साइन पाए गए हैं।

शिकायत के बाद भी दबी रही फाइल, CMO तक पहुंची बात

मिली जानकारी के अनुसार, इस महाघोटाले की शिकायत सबसे पहले जिला परिषद के सीईओ को दी गई थी, लेकिन महीनों तक कोई कार्रवाई नहीं हुई। हैरानी की बात यह है कि जब जिला परिषद ने चुप्पी साधे रखी, तब मामला मुख्यमंत्री कार्यालय (CMO) तक पहुंचा। इसके बाद जिला कलेक्टर ने कड़ा रुख अपनाते हुए जांच टीम गठित की और 7 VDO को घर बैठा दिया। चर्चा है कि इस खेल में जिला परिषद के बड़े अधिकारियों का संरक्षण भी शामिल हो सकता है।

3 साल के रिकॉर्ड की होगी पड़ताल, 10 दिन का अल्टीमेटम

ग्राउंड सूत्रों के अनुसार, डीएम ने साल 2023 से लेकर 2026 तक जारी हुए सभी जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्रों की स्क्रूटनी करने के निर्देश दिए हैं। आबू रोड की सभी 32 ग्राम पंचायतों का रिकॉर्ड खंगाला जा रहा है। जांच टीम को महज 10 दिन के भीतर अपनी फाइनल रिपोर्ट सौंपने को कहा गया है। इस कार्रवाई के बाद से ब्लॉक के अन्य कर्मचारियों में भी भारी दहशत का माहौल है।

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