दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता (Rekha Gupta) ने दिल्ली हाई कोर्ट (Delhi High Court) की जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा (Swarn Kanta Sharma) द्वारा दिए गए फैसले का स्वागत किया है। यह फैसला अरविंद केजरीवाल (Arvind Kejriwal) की उस रिक्यूजल याचिका पर आया, जिसमें उन्होंने संबंधित जज को केस से हटाने की मांग की थी। मुख्यमंत्री ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि यह निर्णय एक साफ और स्पष्ट संदेश देता है कि न्यायपालिका की स्वतंत्रता, निष्पक्षता और गरिमा से कोई समझौता नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा कि अदालत का यह रुख लोकतांत्रिक व्यवस्था में न्यायपालिका की मजबूती और निष्पक्षता को दर्शाता है। CM के मुताबिक, ऐसे फैसले न्याय व्यवस्था में आम लोगों के भरोसे को और मजबूत करते हैं।

केजरीवाल द्वारा न्यायिक प्रक्रिया पर लांछन लगाने और हाई कोर्ट के एक मौजूदा जज की निष्पक्षता पर सवाल उठाने का प्रयास न केवल अनुचित है, बल्कि यह लोकतांत्रिक संस्थाओं की गरिमा को भी गंभीर रूप से कमज़ोर करता है। जब उच्च सार्वजनिक पदों पर रह चुके लोग इस तरह का आचरण करते हैं, तो इससे न्याय व्यवस्था पर जनता का भरोसा कम होने का खतरा पैदा हो जाता है। यह देखना भी उतना ही दुर्भाग्यपूर्ण है कि एक ऐसा सिलसिला बार-बार देखने को मिलता है, जिसमें न्यायिक आदेशों को अपनी सुविधा के अनुसार तो मान लिया जाता है, लेकिन जब वे सुविधाजनक नहीं होते, तो उन पर सवाल उठाए जाते हैं। कानून के शासन द्वारा संचालित संवैधानिक लोकतंत्र में ऐसे दोहरे मापदंडों के लिए कोई जगह नहीं है।

माननीय न्यायालय ने बिल्कुल सही रूप से इस बात पर ज़ोर दिया है कि कोई भी व्यक्ति चाहे उसका पद या प्रभाव कुछ भी क्यों न हो न्यायिक प्रक्रिया से ऊपर नहीं है। न्याय को केवल धारणाओं के आधार पर नहीं गढ़ा जा सकता, और न ही सत्य को बयानबाज़ी या सार्वजनिक चर्चा के माध्यम से बदला जा सकता है। लोग विवेकशील हैं और संस्थागत अखंडता के प्रति गहरी जिम्मेदारी की भावना के साथ इन घटनाक्रमों का बारीकी से अवलोकन कर रहे हैं। हम इस निर्णय का पूर्ण सम्मान करते हैं और न्यायपालिका में अपने अटूट विश्वास को दोहराते हैं।

वीरेन्द्र सचदेवा बोले- न्यायाधीश पर निजी टिप्पणी अस्वीकार्य

दिल्ली की सियासत में अरविंद केजरीवाल की रिक्यूजल याचिका खारिज होने के बाद बयानबाजी तेज हो गई है। वीरेन्द्र सचदेवा ने दिल्ली हाई कोर्ट की जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा के फैसले का स्वागत करते हुए केजरीवाल की टिप्पणियों पर कड़ा ऐतराज जताया। सचदेवा ने कहा कि वह न्यायाधीश के फैसले में की गई टिप्पणियों से पूरी तरह सहमत हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि हाल के दिनों में केजरीवाल द्वारा की गई निजी टिप्पणियां किसी भी न्यायाधीश की भावनाओं को ठेस पहुंचाने वाली हैं।

उन्होंने आगे कहा कि न्यायपालिका की गरिमा का सम्मान होना चाहिए और इस तरह की बयानबाजी लोकतांत्रिक संस्थाओं के लिए उचित नहीं है। सचदेवा ने केजरीवाल के तर्कों पर सवाल उठाते हुए कहा कि यदि किसी जज के परिजन का सरकारी वकील होना गलत माना जाए, तो क्या यह भी मान लिया जाए कि किसी आरोपी या अपराधी के परिजन वकील नहीं बन सकते? केजरीवाल “अधिक चतुराई” दिखाने के चक्कर में अक्सर मर्यादाएं लांघ जाते हैं और उन्हें समझना चाहिए कि अदालतें इंसाफ का मंदिर होती हैं, न कि राजनीतिक अखाड़ा।

सचदेवा ने आरोप लगाया कि केजरीवाल ने निजी टिप्पणियां कर एक नैरेटिव बनाने की कोशिश की, जो पूरी तरह गलत है। उनके मुताबिक, न्यायालय के फैसले तथ्यों (facts) और निष्कर्षों (findings) के आधार पर होते हैं, न कि राजनीतिक बयानबाजी पर। उन्होंने आगे कहा कि “राजनीतिक चतुराई” दिखाने की कोशिश कर रहे केजरीवाल को आज अदालत ने उनकी “वास्तविक स्थिति” दिखा दी है। सचदेवा ने जोर दिया कि न्यायपालिका की गरिमा का सम्मान करना सभी के लिए जरूरी है और इस तरह की टिप्पणियों से बचना चाहिए।

“न्यायपालिका दबाव में नहीं झुकती, कोर्ट ने दिखाया आईना”

दिल्ली सरकार में मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा ने दिल्ली हाई कोर्ट के हालिया फैसले के बाद अरविंद केजरीवाल पर तीखा हमला बोला है। सिरसा ने अपने सोशल मीडिया पोस्ट में कहा कि अदालत द्वारा रिक्यूजल याचिका खारिज किया जाना यह साफ संदेश देता है कि न्यायपालिका किसी भी दबाव या आरोपों के आगे नहीं झुकती।उन्होंने आरोप लगाया कि केजरीवाल को यह भ्रम था कि सोशल मीडिया पर “नैरेटिव” बनाकर वे अदालती कार्यवाही को प्रभावित कर सकते हैं, लेकिन अदालत ने उन्हें सख्त संदेश देकर “आईना दिखा दिया”।सिरसा ने यह भी कहा कि फैसले का वह स्वागत करते हैं और आरोप लगाया कि केजरीवाल अपनी सफाई देने के बजाय अक्सर दूसरों पर दोष मढ़ते हैं और न्यायाधीशों पर सवाल उठाते हैं, जो उनकी “पुरानी आदत” है।

केजरीवाल न्यायिक व्यवस्था को कमजोर करने की कोशिश कर रहे

दिल्ली सरकार में मंत्री प्रवेश वर्मा ने अरविंद केजरीवाल पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि वह न्यायपालिका की गरिमा पर सवाल उठाकर “पूरी व्यवस्था को कमजोर करने” की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने दिल्ली हाई कोर्ट के हालिया फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि केजरीवाल से यही अपेक्षा की जा सकती है कि वे अदालतों पर भी सवाल उठाएं। प्रवेश वर्मा ने आरोप लगाया कि जो व्यक्ति पहले सेना पर सवाल उठा चुका है और झूठी कसमों जैसे आरोपों से भी जुड़ा रहा है, वही अब न्यायपालिका को निशाना बनाकर व्यवस्था को प्रभावित करने की कोशिश कर रहा है।

उन्होंने यह भी कहा कि जिस महिला जज के समक्ष आबकारी मामले से जुड़ी याचिका दायर हुई है, उन्हें केवल इसलिए निशाना बनाया जा रहा है क्योंकि उन्होंने किसी कार्यक्रम में भाग लिया था, जिसके आधार पर केजरीवाल ने अपनी व्यक्तिगत राय बना ली। वर्मा के अनुसार, यदि भविष्य में अदालत का फैसला केजरीवाल के पक्ष में आता है तो वे उसे सही बताएंगे, लेकिन अगर फैसला उनके खिलाफ जाता है तो वे पहले से ही उसे “पक्षपाती” बताकर सवाल खड़े करेंगे। उन्होंने इसे राजनीतिक अवसरवाद की मिसाल बताया और कहा कि इससे न्यायपालिका पर अनावश्यक दबाव बनाने की कोशिश हो रही है।

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