CG News : वीरेन्द्र गहवई, बिलासपुर. रायगढ़ जिले के अंतर्गत तहसील पुसौर में पदस्थ रहे पटवारी सच्चिदानंद साहू के विरुद्ध छत्तीसगढ़ बोर्ड ऑफ रेवेन्यू, बिलासपुर द्वारा जारी विभागीय जांच प्रारंभ करने के निर्देश पर उच्च न्यायालय ने रोक लगा दी है. साथ ही उत्तरवादी राज्य शासन, सचिव बोर्ड ऑफ रेवेन्यू, आयुक्त राजस्व बिलासपुर संभाग, कलेक्टर रायगढ़, अनुविभागीय अधिकारी राजस्व रायगढ़ और तहसीलदार पुसौर को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है.
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यह मामला रायगढ़ जिले के अंतर्गत तहसील पुसौर में पदस्थ रहे पटवारी सच्चिदानंद साहू से संबंधित है, जिनके विरुद्ध छत्तीसगढ़ बोर्ड ऑफ रेवेन्यू, बिलासपुर द्वारा पारित आदेश दिनांक 21 अगस्त 2025 के पैरा 08 में प्रतिकूल टिप्पणी करते हुए विभागीय एवं प्रशासनिक कार्यवाही प्रारंभ करने के निर्देश दिए गए थे. उक्त आदेश में बोर्ड ऑफ रेवेन्यू द्वारा राज्य शासन के मुख्य सचिव को भी कार्यवाही सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया था.
यह कि सच्चिदानंद साहू को 02 नवंबर 2015 को पटवारी के पद पर नियुक्त किया गया था और वे तहसील पुसौर, जिला रायगढ़ में पदस्थ थे. अपने शासकीय कर्तव्यों के निर्वहन के दौरान उनके द्वारा दिनांक 12 अक्टूबर 2020 को पंचनामा तैयार किया गया और 26 अक्टूबर 2020 को जांच प्रतिवेदन प्रस्तुत किया गया था, जो ग्राम पुसौर स्थित खसरा नंबर 16 2 बी, रकबा 0.121 हेक्टेयर से संबंधित था. उक्त प्रतिवेदन स्थल निरीक्षण एवं ग्राम कोटवार और ग्रामवासियों की उपस्थिति में तैयार किया गया था, जिसके आधार पर तहसीलदार पुसौर द्वारा नामांतरण आदेश दिनांक 28 अक्टूबर 2020 पारित किया गया.
उक्त भूमि को लेकर बाद में पक्षकारों के मध्य दीवानी एवं राजस्व विवाद उत्पन्न हुआ, जिसके संबंध में सिविल न्यायालय, उपविभागीय अधिकारी राजस्व, अतिरिक्त आयुक्त तथा अंततः बोर्ड ऑफ रेवेन्यू के समक्ष कार्यवाही चली. जहां एक ओर तहसीलदार एवं एसडीओ द्वारा नामांतरण को उचित ठहराया गया, वहीं अतिरिक्त आयुक्त एवं बोर्ड ऑफ रेवेन्यू द्वारा भिन्न दृष्टिकोण अपनाया गया. बोर्ड ऑफ रेवेन्यू ने न केवल अधीनस्थ अधिकारियों के आदेशों को निरस्त किया बल्कि पैरा 08 में पटवारी और तहसीलदार के विरुद्ध कठोर टिप्पणियां करते हुए विभागीय जांच के निर्देश भी जारी कर दिए.
बोर्ड ऑफ रेवेन्यू के उक्त आदेश से व्यथित होकर सच्चिदानंद साहू द्वारा अधिवक्ता मतीन सिद्दीकी और सिबाशिष मिश्रा के माध्यम से उच्च न्यायालय में रिट याचिका प्रस्तुत की गई, जिसमें प्रकरण की सुनवाई के दौरान अधिवक्ता मतीन सिद्दीकी ने पक्ष रखा. याचिका की सुनवाई 06 जनवरी 2026 को न्यायमूर्ति पार्थ प्रतीम साहू के समक्ष हुई. याचिकाकर्ता की ओर से यह तर्क रखा गया कि बिना कोई अवसर प्रदान किए और प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का पालन किए बिना प्रतिकूल टिप्पणियां और विभागीय जांच के निर्देश देना विधि विरुद्ध है. यह भी प्रतिपादित किया गया कि बोर्ड ऑफ रेवेन्यू को पुनरीक्षण अधिकार क्षेत्र में रहते हुए इस प्रकार की प्रतिकूल टिप्पणी करने और विभागीय कार्यवाही निर्देशित करने का अधिकार नहीं है.
उक्त तर्कों पर प्रथम दृष्टया संतुष्ट होते हुए उच्च न्यायालय, न्यायमूर्ति पार्थ प्रतीम साहू द्वारा अंतरिम आदेश पारित करते हुए बोर्ड ऑफ रेवेन्यू द्वारा पारित आदेश दिनांक 21 अगस्त 2025 के उस भाग पर रोक लगा दी है, जिसमें याचिकाकर्ता के विरुद्ध विभागीय जांच प्रारंभ करने के निर्देश दिए गए थे. साथ ही राज्य शासन सहित सभी संबंधित उत्तरवादियों को नोटिस जारी कर जवाब प्रस्तुत करने के लिए समय प्रदान किया गया है.
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