रायपुर। वित्त मंत्री ओपी चौधरी ने सोमवार को विधानसभा में साय सरकार का तीसरा बजट पेश किया. ‘ज्ञान’ और ‘गति’ के बाद प्रस्तुत इस एक लाख 72 हजार करोड़ रुपए के ‘संकल्प’ बजट में एक-एक खर्च का विस्तार से ब्यौरा दिया गया है. अपने 1 घंटे 47 मिनट के बजट भाषण में जिन-जिन पहलुओं पर फोकस किया, हम उसका पाई-पाई का हिसाब आपके पास आंकड़ों और ग्राफ के जरिए प्रस्तुत कर रहे हैं.
यह भी पढ़ें : CG Budget 2026 : व्यापारियों और महिलाओं ने की बजट की तारीफ, जानिए क्या कहा?
2 हजार करोड़ के घाटे वाले इस बजट में एक तरफ जहां 1 लाख 43 हजार करोड़ रुपए आय का अनुमान जताया गया है, तो वहीं दूसरी ओर 1 लाख 72 हजार करोड़ रुपए खर्च का अनुमान लगाया गया है. इस तरह से यह 20,400 करोड़ रुपए का राजकोषीय घाटे के अनुमान है. यह राज्य के सकल घरेलू उत्पाद का 2.87 प्रतिशत है.

प्राप्तियों की बात करें तो 1 लाख 43 हजार करोड़ रुपए में से राज्य के स्वयं के संसाधन से 77 हजार करोड़ तो दूसरी ओर केंद्र की प्राप्तियों से 66 हजार करोड़ रुपए का अनुमान जताया गया है. वहीं पूंजीगत प्राप्ति से 29 हजार करोड़ रुपए का अनुमान जताया गया है.

वहीं व्यय की बात करें तो 1 लाख 45 हजार करोड़ रुपए राजस्व व्यय के तौर पर खर्च होंगे, वहीं पूंजीगत व्यय के तौर पर 26,500 करोड़ रुपए और ऋण एवं अग्रिम के तौर पर 500 करोड़ रुपए व्यय का अनुमान खींचा गया है.
इस तरह से जहां राज्य को प्राप्त एक रुपए में सर्वाधिक 30 प्रतिशत कर राजस्व के तौर पर तो 29 प्रतिशत हिस्सा केंद्रीय करों में राज्य के हिस्सों के तौर पर है. 14 प्रतिशत कर भिन्न राजस्व से प्राप्ति होगी. 12 प्रतिशत शुद्ध लोक ऋण के तौर पर प्राप्त होगा. इसके अलावा 9 प्रतिशत केंद्र से अनुदान, 5 प्रतिशत राज्य को पूंजी निवेश के लिए प्रदान की जा रही विशेष सहायता तो एक प्रतिशत लोक लेखे प्राप्तियां से होगी.

आवक के बाद यदि जावक की बात करें तो राज्य का एक रुपए का बड़ा हिस्सा, 32 प्रतिशत प्रतिबद्ध व्यय के तौर पर होगा. इसके अलावा 30 प्रतिशत राज्य प्रायोजित मुख्य योजना में, 16 प्रतिशत पूंजीगत व्यय में तो 14 प्रतिशत केंद्र प्रायोजित योजना के तौर पर व्यय होगां. शेष 8 प्रतिशत अन्य राजस्व व्यय के तौर पर व्यय होगा.

बजट का 70 प्रतिशत विभागों को
वित्त मंत्री ओपी चौधरी ने अपने बजट में 70 प्रतिशत हिस्सा विभागों को आवंटित किया है. यहां पर सरकार की प्राथमिकता सामने आती है. इसमें सबसे ज्यादा 13 प्रतिशत याने 22,360 करोड़ रुपए स्कूल शिक्षा विभाग को आवंटित किया गया है. वहीं 9.6 प्रतिशत याने 16,560 करोड़ रुपए पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग को आवंटित किया गया है. इसके बाद कृषि (7.9 प्रतिशत), खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति (7.5 प्रतिशत), महिला एवं बाल विकास विभाग (6.4 प्रतिशत), लोक निर्माण विभाग (5.5 प्रतिशत), ऊर्जा के लिए (5.2 प्रतिशत), लोक स्वास्थ्य (5 प्रतिशत), गृह विभाग के लिए (4.9 प्रतिशत) और लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी के लिए (3.5 प्रतिशत) आवंटित किया गया है.

किसानों से जुड़ी योजना पर सर्वाधिक व्यय
साय सरकार अपने तीसरे बजट में सर्वाधिक 10 हजार करोड़ रुपए कृषक उन्नति योजना पर खर्च करेगी. इसके बाद महतारी वंदन योजना आता है, जिस पर सरकार के 8,200 करोड़ खर्च होंगे. मुख्यमंत्री खाद्यान्न योजना में 6,500 करोड़ रुपए खर्च का अनुमान है. ऊर्जा सब्सिडी के तौर पर सरकार के 6,700 करोड़ रुपए खर्च होंगे. इसके अलावा प्रधानमंत्री आवास योजना ग्रामीण और विकसित भारत जी राम जी पर सरकार 4-4000 करोड़ रुपए खर्च करेगी.

- छत्तीसगढ़ की खबरें पढ़ने यहां क्लिक करें
- लल्लूराम डॉट कॉम की खबरें English में पढ़ने यहां क्लिक करें
- खेल की खबरें पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें


