शनिदेव को प्रसन्न करने के लिए काला कपड़ा, काला तिल, काले चने, काली उड़द या लोहे का समान चढ़ाया जाता है. मान्यता है कि शनिदेव को काली वस्तुएं ही पसंद हैं. इसलिए उनकी पूजा में विशेषतौर पर काली वस्तुओं का ही प्रयोग होता है. शनिवार शनिदेव का प्रिय दिन है. विद्वानों का मानना है कि शनिवार को काला रंग पहनने से उनकी कृपा प्राप्त होती है. शनि की कृपा से जीवन की कठिनाइयां दूर होती हैं. अब लोगों के मन में यह प्रश्न आता है कि शनिदेव और यमराज काले कपड़े ही क्यों पहननते हैं?

शनिदेव और यमराज दोनों सूर्यदेव के पुत्र हैं. दोनों ही काले वस्त्र धारण करते हैं. इन दोनों देवताओं को न्याय का दायित्व सौंपा है. जीवित प्राणियों को उनके कर्मों का फल शनिदेव देते हैं, जबकि मृत्यु के बाद कर्मों का निर्णय यमराज करते हैं. माना जाता है कि न्याय के इस कठोर दायित्व के कारण ही दोनों देव काले वस्त्र पहनते हैं. यदि वे क्रूर और कठोर स्वरूप में न हों तो न्याय संभव नहीं हो पाएगा, क्योंकि जैसे कर्म होते हैं, वैसा ही फल देना उनका कर्तव्य है. काले वस्त्रों को न्याय का प्रतीक भी माना गया है. पृथ्वी पर न्यायाधीश और वकील भी काले कपड़े पहनकर न्याय करते हैं. मान्यता है कि काला रंग निष्पक्षता और कठोरता का प्रतीक है. एक कारण यह भी बताया जाता है कि काले रंग पर दूसरा रंग नहीं चढ़ता.
पौराणिक कथा के अनुसार, सूर्यदेव की पत्नी संध्या उनके तेज को सहन नहीं कर पाईं और अपनी छाया को उनके पास छोड़कर चली गईं. छाया से ही शनिदेव का जन्म हुआ. जन्म के समय वे अत्यंत काले और दुर्बल थे. काला पुत्र देखकर सूर्यदेव ने उन्हें स्वीकार नहीं किया. जिससे शनिदेव को ठेस पहुंची. शनिवार के दिन काले वस्त्र धारण करना शुभ माना जाता है.


