नेपाल में जानलेवा विरोध प्रदर्शनों के बाद पहला चुनाव 5 मार्च को होने जा रहा है. जहां 3 बड़े नेता प्रधानमंत्री बनने की होड़ में हैं. इनमें एक पूर्व रैपर जो काठमांडू के मेयर रह चुके हैं. दूसरे नेपाल की सबसे पुरानी राजनीतिक पार्टी के युवा नेता हैं. और तीसरे पुराने कम्युनिस्ट नेता जो पिछले साल युवाओं के विरोध प्रदर्शनों में हटाए जाने के बाद सत्ता में वापसी की उम्मीद कर रहे हैं. इसमें दर्जनों लोग मारे गए थे. इस चुनाव में जो भी जीतेगा, वह दो दशक से भी कम समय में नेपाल का 16वां प्रधानमंत्री बन जाएगा. यह दिखाता है कि 2008 में राजशाही खत्म होने के बाद से इस हिमालयी देश में बार-बार राजनीतिक अस्थिरता बनी हुई है.

नेपाल अब ‘क्रांति’ के बाद नया नेतृत्व चुनने को तैयार है. यहां 5 मार्च 2026 को वोट डाले जाएंगे. इस चुनाव से युवाओं को एक बदलाव की उम्मीद है. हालांकि पिछली सरकार की अगुआई कर रहे केपी ओली भी इस चुनाव में पीएम की रेस में हैं. लेकिन दो युवाओं से उन्हें चुनौती मिल रही है.

ओली ने लगातार कहा है कि नेपाल के लिए स्थिर पॉलिसी और पॉलिटिक्स ज़रूरी हैं. उन्होंने चेतावनी दी है कि इकॉनामी को डेवलप होने के लिए स्थिरता की ज़रूरत है. 

ओली ने लगातार कहा है कि नेपाल के लिए स्थिर पॉलिसी और पॉलिटिक्स ज़रूरी हैं. उन्होंने चेतावनी दी है कि इकॉनामी को डेवलप होने के लिए स्थिरता की ज़रूरत है. 

ये पूर्व प्रधानमंत्री के पी ओली की सरकार गिरने के बाद पहला चुनाव है. बलेंद्र शाह, जिन्हें बालेन के नाम से जाना जाता है, कैंपेन के दौरान एक पॉपुलर हस्ती के तौर पर उभरने के बाद इस रेस में सबसे आगे देखे जा रहे हैं. वह 2022 में राजधानी काठमांडू के मेयर चुने गए थे और बाद में नेशनल इंडिपेंडेंट पार्टी के प्राइम मिनिस्टर कैंडिडेट बनने के लिए पद छोड़ दिया था.

35 साल के शाह ने एक स्ट्रक्चरल इंजीनियर के तौर पर ट्रेनिंग ली और बाद में एक रैप आर्टिस्ट के तौर पर थोड़ी-बहुत पहचान बनाई. वे अपने म्यूज़िक का इस्तेमाल सामाजिक मुद्दों और पॉलिटिक्स पर की खामियों को दिखाने के लिए करते हैं.

शाह ने पारंपरिक राजनीतिक पार्टियों के खिलाफ लोगों के गुस्से पर सवार होकर एक इंडिपेंडेंट उम्मीदवार के तौर पर काठमांडू मेयर का चुनाव जीता.

एक और दावेदार हैं गगन थापा, जो नेपाली कांग्रेस के नए लीडर बने हैं. नेपाली कांग्रेस देश की सबसे पुरानी बड़ी पॉलिटिकल पार्टी है. यह एक लिबरल डेमोक्रेटिक पार्टी है जिसके भारत से करीबी रिश्ते हैं.

नेपाली कांग्रेस में लंबे समय से एक पॉपुलर चेहरे के तौर पर देखे जाने वाले 49 साल के थापा को इस साल की शुरुआत तक पार्टी की सीनियर लीडरशिप ने रोक रखा था, जब उन्होंने बगावत की और पार्टी चीफ के तौर पर अपना चुनाव पक्का कर लिया. नेपाली कांग्रेस देश की राजनीति में एक पॉपुलर पार्टी बनी हुई है, लेकिन यह पिछली गठबंधन सरकार का हिस्सा थी जिसे सितंबर में युवाओं के बगावत के कारण बाहर होना पड़ा था.

थापा का कहना है कि उनकी पहली प्राथमिकता पांच साल के अंदर नेपाल को भ्रष्टाचार से मुक्त करना और सरकार को जनता के प्रति पूरी तरह से जवाबदेह बनाना होगा.

पिछले साल के विरोध प्रदर्शनों को संभालने के उनके तरीके की आलोचना के बावजूद ओली को अभी भी कम्युनिस्ट पार्टी और उसके कई समर्थकों का सपोर्ट है. इस पोस्ट के लिए तीसरे दावेदार खड्ग प्रसाद ओली हैं, जो विवादित लेकिन मज़बूत कम्युनिस्ट नेता हैं.

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