मुजफ्फरपुर। जिले के जिला उपभोक्ता आयोग ने सहारा इंडिया के खिलाफ एक बड़ा फैसला सुनाते हुए निवेशक को 14,37,000 भुगतान करने का आदेश दिया है। आयोग ने स्पष्ट किया है कि यदि निर्धारित समय सीमा के भीतर भुगतान नहीं किया गया, तो कंपनी को अतिरिक्त ब्याज भी भरना होगा।
निवेश के साथ हेराफेरी का मामला
लहलादपुर निवासी गौरीशंकर सिंह ने साल 2010 में सहारा इंडिया की पंकज मार्केट शाखा में 8 लाख रुपए का निवेश किया था। अनुबंध के अनुसार, उन्हें हर महीने 7,000 ब्याज मिलना था। हालांकि, कंपनी के कर्मियों पर आरोप है कि उन्होंने कागजी हेराफेरी कर ब्याज की राशि को करजा शाखा में स्थानांतरित कर दिया, जिससे निवेशक को लाभ नहीं मिला। 2020 में मैच्योरिटी पूरी होने के बाद भी जब पैसा नहीं लौटाया गया, तब मामला आयोग पहुंचा।
आयोग का सख्त रुख और मुआवजा
मानवाधिकार अधिवक्ता एस.के. झा की दलीलों और साक्ष्यों को देखने के बाद, आयोग के अध्यक्ष पीयूष कमल दीक्षित और सदस्य सुनील कुमार तिवारी की पीठ ने इसे ‘सेवा में कमी’ और उपभोक्ता अधिकारों का उल्लंघन माना।
कोर्ट ने आदेश दिए:
मूल भुगतान: 14,37,000 की राशि निवेशक को दी जाए।
ब्याज: 17 जून 2020 से 8% वार्षिक ब्याज का भुगतान करना होगा।
हर्जाना: मानसिक और शारीरिक कष्ट के लिए 20,000 और कानूनी खर्च के लिए 10,000 अतिरिक्त देय होंगे।
डेडलाइन: 45 दिनों के भीतर भुगतान न करने पर ब्याज दर बढ़ाकर 10% कर दी जाएगी।
जानलेवा हमले का भी आरोप
यह मामला केवल वित्तीय धोखाधड़ी तक सीमित नहीं है। परिवादी गौरीशंकर सिंह पर साल 2020 में सहारा कर्मियों द्वारा जानलेवा हमला भी किया गया था, जिसका आपराधिक मुकदमा मुजफ्फरपुर सिविल कोर्ट में पहले से ही लंबित है। अधिवक्ता एस.के. झा ने इस फैसले को सहारा से त्रस्त अन्य निवेशकों के लिए एक उम्मीद की किरण बताया है।
- छत्तीसगढ़ की खबरें पढ़ने यहां क्लिक करें
- उत्तर प्रदेश की खबरें पढ़ने यहां क्लिक करें
- लल्लूराम डॉट कॉम की खबरें English में पढ़ने यहां क्लिक करें
- खेल की खबरें पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें
- मनोरंजन की बड़ी खबरें पढ़ने के लिए क्लिक करें

