Rajasthan Dog Bite Case: राजस्थान की राजधानी जयपुर समेत प्रदेश के कई बड़े शहरों में अब सड़कों पर निकलना दुश्वार हो गया है। एक आरटीआई (RTI) से मिली जानकारी के अनुसार, साल 2025 में कुत्तों के काटने की घटनाएं पिछले साल के मुकाबले लगभग दोगुनी हो गई हैं। सबसे डराने वाली बात यह है कि इन हमलों का सबसे आसान शिकार मासूम बच्चे बन रहे हैं।

जयपुर बना डॉग बाइट कैपिटल, आंकड़े दे रहे गवाही
बता दें कि आरटीआई कार्यकर्ता चंद्रशेखर गौड़ द्वारा जुटाए गए आंकड़ों ने नगर निगम और प्रशासन की पोल खोल दी है। अकेले जयपुर में जहां 2024 में 307 मामले आए थे, वहीं 2025 में यह संख्या बढ़कर 633 पहुंच गई है। गौर करने वाली बात है कि यह पूरे प्रदेश में सबसे ज्यादा है।
मासूमों पर टूट रहा कहर
दरअसल, कुत्तों के हमलों में बच्चों की संख्या में भारी बढ़ोत्तरी हुई है। जयपुर के जेके लोन अस्पताल और अन्य केंद्रों के रिकॉर्ड बताते हैं कि जयपुर में 2024 में 45 बच्चे शिकार हुए, जो 2025 में बढ़कर 65 हो गए। खैरथल-तिजारा में भी यह आंकड़ा 4 से बढ़कर 9 पहुंच गया है। कोचिंग सिटी कोटा में भी कुत्तों का आतंक बढ़ा है, यहां 9 के मुकाबले 16 बच्चे शिकार हुए हैं।
इन जिलों में भी मचा हड़कंप (2025 के आंकड़े)
गौरतलब है कि जयपुर के बाद खैरथल-तिजारा (55 मामले), पाली (46 मामले), कोटा (45 मामले) और भीलवाड़ा (33 मामले) में सबसे ज्यादा दहशत देखी गई है। हालांकि बीकानेर से राहत की खबर है, जहां मामले 6 से घटकर 2 रह गए हैं।
शहरों में ज्यादा खतरा, गांव अभी सुरक्षित
आंकड़ों का विश्लेषण करें तो साफ पता चलता है कि आवारा कुत्तों का आतंक शहरी इलाकों में ज्यादा है। रिपोर्ट के अनुसार, शहरों में कचरे के ढेर और नसबंदी कार्यक्रमों की सुस्ती के कारण कुत्तों की संख्या और आक्रामकता दोनों बढ़ी है, जबकि ग्रामीण इलाकों में स्थिति अब भी नियंत्रण में है।
पढ़ें ये खबरें
- बिहार में भीषण सड़क हादसा: तेज रफ्तार ट्रक ने बाइक सवार युवकों को रौंदा, तीन की दर्दनाक मौत
- योगी कैबिनेट की अहम बैठक, 24 से ज्यादा प्रस्तावों को मिल सकती है हरी झंडी
- दिल्ली के जनकपुरी में खौफनाक मंजर, पुलिसकर्मी को कार ने मारी टक्कर, बोनट पर घसीटता रहा ड्राइवर… हुआ गिरफ्तार
- ‘आतंक का गढ़’ का सरताज बना बदहाल पाकिस्तान! Global Terrorism Index 2026 की सूची में, TTP सबसे खतरनाक संगठन बना
- ‘मोहम्मद अली जिन्ना’ पर जम्मू यूनिवर्सिटी में बवालः पॉलिटिकल साइंस की किताब में अल्पसंख्यकों का नेता बताया; हटाने की मांग को लेकर ABVP का प्रदर्शन, बनी जांच समिति
