Chaitra Navratri 2026. चैत्र नवरात्र का आज छठा दिन है. आज मां के कात्यायनी स्वरूप की पूजा की जाती है. मां कात्यायनी का रूप बेहद सौम्य है. माता चार भुजाओं वाली हैं. सिंह पर सवार माता के एक हाथ में तलवार है एक हाथ में कमल पुष्प और हाथ अभय मुद्रा में है. आज मंदिरों में भगवती के इसी स्वरूप की पूजा की जाएगी. उत्तर प्रदेश के वृंदावन में मां कात्यायनी का एक प्राचीन मंदिर है. यह मंदिर कात्यायनी शक्तिपीठ (Maa Katyayani Shaktipeeth) के नाम से जाना जाता है.

माता का ये मंदिर 51 शक्तिपीठों में से एक है. मान्यता है कि यहां पर देवी सती के केश (बाल) गिरे थे. ये मंदिर भूतेश्वर के पास राधाबाग में स्थित है. यहां मां शक्ति और भगवान शिव ‘उमा’ और ‘भूतेश’ के रूप में पूजे जाते हैं. इसलिए इस मंदिर को उमा शक्तिपीठ (Uma Shaktipeeth) के नाम से भी जाना जाता है. यहां कुंवारे लोग मनचाहा वर-वधू पाने के लिए दर्शन करने आते हैं. पौराणिक कथाओं के अनुसार, ब्रज की गोपियों और राधा रानी ने भगवान श्रीकृष्ण को पति रूप में पाने के लिए इन्ही मां कात्यायनी की पूजा की थी.
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इस मंदिर का उल्लेख श्रीमद्भगवतगीता में मिलता है. महर्षि वेदव्यास ने मां कात्यायनी शक्तिपीठ के बारे में श्रीमद भागवत में वर्णन किया है. धार्मिक ग्रंथों के अनुसार, जिस स्थान पर कात्यायनी शक्ति पीठ है वहां माता सती के केश गिरे थे. किवदंती यह है कि भगवान श्रीकृष्ण को अपने वर रूप में प्राप्त करने के लिए राधारानी ने भी कात्यायनी माता की पूजा की थी.


पौराणिक कथा के अनुसार, राजा दक्ष ने एक विशाल यज्ञ का आयोजन कराया था. अपनी पुत्री सती (पार्वती) ओर भगवान शिव को निमंत्रण नहीं दिया. भगवान शिव और सती दोनों अपमानित हुए. बेटी सती ने यज्ञ में कूद कर अपनी जान दे दी. शिव अग्नि में से पार्वती के शव को निकाल कर ले गए. भगवान विष्णु शिवजी की पवित्रता को देख कर प्रसन्न हो गए और पार्वती को जीवित करने के लिए उनके शरीर के 51 टुकड़े कर दिए. मां पार्वती के केश की लटें यहां गिरीं. यह स्थान कात्यायनी देवी उमा शक्तिपीठ मंदिर के नाम से विख्यात है.
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