रवि रायकवार, दतिया। Chaitra Navratri 2026: विश्व विख्यात पीतांबरा पीठ मंदिर पर पूरे 9 दिन देश भर से श्रद्धालु और साधक आते हैं। मंदिर में दस महाविद्याओ में से दो महाविद्या बगलामुखी देवी और धूमावती देवी यहां विराजमान हैं। राजनेता राजनीति में उच्च स्थान पाने के लिए यहां अनुष्ठान करवाते हैं।
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राजस्थान की पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे हैं ट्रस्ट की अध्यक्ष
वैसे तो मां पीतांबरा के दर्शन मात्र से भक्तों की हर मनोकामना होती पूरी हो जाती है। सत्ता की देवी मानी जाने वाली मां बगलामुखी की नवरात्रि में विशेष पूजा होती है जिसमें देश-विदेश से श्रद्धालु शामिल होते हैं। राजस्थान की पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे इस ट्रस्ट की अध्यक्ष हैं। वह भी नवरात्रि में यहां गुप्त अनुष्ठान करवाती हैं।
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सत्ता की देवी मानी जाती हैं मां बगलामुखी
नवरात्रि में अक्सर देखा जाता है कि यहां राजनेताओं का जमावड़ा काफी रहता है। वह इसलिए क्योंकि यह आस्था का केंद्र है और मां बगलामुखी सत्ता की देवी हैं। राजजीति से जुड़े लोगों का वेसे तो यहां साल भर आना-जाना रहता है। लेकिन जब चुनाव करीब होते हैं तो यह माहौल राजनीतिक ज्यादा हो जाता है और यहां लगातार नेताओं का आगमन होने लगता हैं।
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दूर-दूर से आते हैं श्रद्धालु, 9 दिन करते हैं जाप
नवरात्रि में बाहर से आने वाले श्रद्धालु लगातार नौ दिन जाप करते हैं। ऐसा बताया जाता है कि जो भी श्रद्धालु यहां आते हैं, उनकी मनोकामना मां पूरी करती हैं।यहां विशेष अनुष्ठान भी किए जाते हैं। शत्रु का विनाश करने वाली और मनोकामना पूरी करने वाली मां पीतांबरा नवरात्रि में सबको अपना आशीर्वाद प्रदान करती हैं।
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1935 में हुई थी पीतांबरा पीठ की स्थापना
पीतांबरा पीठ एक प्राचीन और सिद्ध शक्तिपीठ है, जिसकी स्थापना 1935 में परम कल्याण स्वरूप अनंत श्री विभूषित स्वामीजी महाराज ने की थी। यह पवित्र स्थल माँ बगलामुखी और माँ धूमावती को समर्पित है, जो तंत्र-मंत्र और गुप्त पूजा-अर्चना के लिए विख्यात हैं। मां पीतांबरा को राजसत्ता की देवी माना जाता है, और यहां भक्त राजनीतिक विजय, शत्रुओं पर जीत और मनोकामनाओं की पूर्ति के लिए आते हैं।
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