कुंदन कुमार/ पटना। जेडीयू की कमान एक बार फिर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के हाथों में आने पर बिहार की राजनीति गरमा गई है। इस बदलाव पर पूर्व उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव ने सधी हुई प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि यह उनकी पार्टी का आंतरिक निर्णय है। उन्होंने स्पष्ट किया कि जेडीयू के भीतर क्या फैसले होते हैं, इस पर टिप्पणी करना उनका काम नहीं है। हालांकि, तेजस्वी के लहजे से साफ था कि वे इस संगठनात्मक फेरबदल को सरकार की विफलताओं से ध्यान भटकाने की कोशिश मान रहे हैं।
क्राइम डेटा पर छिड़ा वाकयुद्ध
निशांत के जेडीयू में शामिल होने और 2005 से पहले के दौर को दंगा-फसाद का युग बताने पर तेजस्वी ने कड़ा पलटवार किया। उन्होंने आंकड़ों की चुनौती देते हुए कहा, वास्तविक स्थिति जानने के लिए 2005 से 2025 तक का डेटा निकाल कर देख लीजिए। तेजस्वी ने दावा किया कि वर्तमान में बिहार में अपराध एक संगठित रूप ले चुका है, जो पहले कभी नहीं था। उन्होंने विधानसभा के रिकॉर्ड का हवाला देते हुए कहा कि एनसीआरबी (NCRB) के आंकड़ों के अनुसार, बिहार अब अपराध के मामले में उत्तर प्रदेश के बाद दूसरे स्थान पर आ खड़ा हुआ है।
सम्राट मॉडल बनाम जनता के मुद्दे
बिहार में सम्राट मॉडल लागू करने की चर्चाओं पर तेजस्वी ने तंज कसते हुए कहा कि यहां कोई मॉडल काम नहीं करेगा। उन्होंने आरोप लगाया कि सूबे की जनता मौजूदा सरकार से त्रस्त है। महंगाई, बेरोजगारी और गरीबी ने आम आदमी की कमर तोड़ दी है।
बदहाल किसान और तेजस्वी की चिट्ठी
तेजस्वी ने किसानों की बदहाली का मुद्दा उठाते हुए कहा कि हाल ही में आए ओला तूफान से फसलें बर्बाद हो गई हैं, लेकिन सरकार सोई हुई है। उन्होंने मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर मांग की है कि प्रभावित किसानों को अविलंब राहत पैकेज दिया जाए। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर अन्नदाता परेशान रहा, तो किसी भी मॉडल का कोई अर्थ नहीं रह जाएगा।
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