देश की सर्वोच्च अदालत सुप्रीम कोर्ट ने स्पेशल कोर्ट के गठन (Special Court Formation) से जुड़े मामले पर स्वतः संज्ञान लिया है। सुप्रीम कोर्ट ने UAPA और NIA मामलों की त्वरित सुनवाई के लिए विशेष अदालतों के गठन पर स्वतः संज्ञान लिया है. इस मामले को गंभीरता से लेते हुए कोर्ट ने 17 हाई कोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल को नोटिस जारी किया है। अदालत ने स्पष्ट किया कि इस विषय पर हाई कोर्ट के विचार भी बेहद जरूरी हैं, क्योंकि कई राज्यों में विशेष कानूनों के तहत बड़ी संख्या में मामले लंबित हैं।
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि उसे जानकारी मिली है कि 17 ऐसे राज्य हैं, जहां NIA के तहत 10 से अधिक मुकदमे, विशेष रूप से UAPA के अंतर्गत लंबित हैं। इस स्थिति को देखते हुए अदालत ने मामलों के शीघ्र निपटारे के लिए विशेष अदालतों के गठन की आवश्यकता पर जोर दिया है।
कोर्ट ने 17 हाई कोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल को नोटिस जारी कर उनके विचार मांगे हैं, क्योंकि कई राज्यों में इन कानूनों के तहत बड़ी संख्या में मुकदमे लंबित हैं. गृह मंत्रालय ने भी स्टेटस रिपोर्ट दाखिल की है. मामले की अगली सुनवाई 4 हफ्ते बाद होगी.
गृह मंत्रालय ने NIA मामलों के अलावा अन्य मामलों पर स्टेटस रिपोर्ट दाखिल की है. कई राज्य और केंद्र शासित प्रदेश के महाधिवक्ता पेश हुए. मामले की अगली सुनवाई 4 हफ्ते बाद होगी. ये सुनवाई सीजेआई सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्य बागची की पीठ में होगी. इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने UAPA और एमसीओसीए जैसे विशेष कानूनों के तहत मामलों की सुनवाई में तेजी लाने के लिए स्पेशल कोर्ट के गठन का सुझाव दिया था.
इस मामले में CJI सूर्यकांत ने कहा, क्या अब हम इस आधार पर आगे बढ़ें कि सरकार विशेष NIA अदालतों की स्थापना के लिए फंड का एक निश्चित हिस्सा आवंटित करने के लिए प्रतिबद्ध है? इस पर अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी ने कहा, जी हां. सीजेआई ने कहा तो फिर UAPA और नारकोटिक्स से जुड़े मामले भी हैं.
इस पर एएसजी ने जवाब दिया कि एनआईए अदालतें UAPA से जुड़े मामलों को भी देखेंगी. सीजेआई ने कहा किन्यायिक पक्ष से ये मामले हमारे अधिकार क्षेत्र में नहीं आते. केंद्र को बुनियादी ढांचे के विकास के लिए इस शर्त के साथ फंड जारी करना चाहिए कि इसका इस्तेमाल सिर्फ़ निर्माण कार्यों के लिए ही किया जाएगा.
इस महत्वपूर्ण मामले की अगली सुनवाई चार हफ्ते बाद तय की गई है। सुप्रीम कोर्ट ने पहले भी UAPA और MCOCA जैसे विशेष कानूनों के तहत लंबित मामलों की सुनवाई में तेजी लाने के लिए स्पेशल कोर्ट के गठन का सुझाव दिया था, जिस पर अब आगे की प्रक्रिया तेज होने की उम्मीद है।
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