सिद्धार्थ शरद/ वैशाली। बिहार विद्यालय परीक्षा समिति (BSEB) द्वारा आयोजित मैट्रिक परीक्षा के परिणामों ने आज एक नई मिसाल पेश की है। वैशाली जिले के एक छोटे से गांव छौराही की साबरिन परवीन ने 500 में से 492 अंक प्राप्त कर पूरे राज्य में प्रथम स्थान हासिल किया है। साबरिन की इस ऐतिहासिक उपलब्धि ने न केवल उनके परिवार, बल्कि पूरे वैशाली जिले का मान बढ़ाया है।
साधारण पृष्ठभूमि, असाधारण उपलब्धि
साबरिन की जीत इसलिए खास है क्योंकि उनका सफर आसान नहीं था। उनके पिता एक साधारण टायर मरम्मत की दुकान चलाते हैं। सीमित संसाधनों और आर्थिक चुनौतियों के बावजूद, उन्होंने अपनी बेटी की शिक्षा को प्राथमिकता दी। पांच भाई-बहनों में सबसे बड़ी साबरिन ने विपरीत परिस्थितियों को अपनी कमजोरी नहीं, बल्कि ताकत बनाया और करीब 15 लाख परीक्षार्थियों को पीछे छोड़ते हुए शिखर पर अपनी जगह बनाई।
भविष्य का लक्ष्य: डॉक्टर बन समाज की सेवा
अपनी सफलता का श्रेय माता-पिता और शिक्षकों को देते हुए साबरिन ने कहा, मेरे परिवार ने कभी भी तंगी को मेरी पढ़ाई के बीच नहीं आने दिया। उनका अटूट विश्वास ही मेरी सबसे बड़ी शक्ति है। साबरिन का सपना अब एक योग्य डॉक्टर बनकर समाज के गरीब और जरूरतमंद तबके की सेवा करना है।
जश्न का माहौल और प्रेरणा की लहर
रिजल्ट की घोषणा होते ही छौराही गांव में उत्सव जैसा माहौल है। साबरिन के घर पर बधाई देने वालों का तांता लगा हुआ है। लोग इसे बिहार की बेटियों की बढ़ती ताकत के रूप में देख रहे हैं। यह सफलता उन लाखों ग्रामीण छात्रों के लिए प्रेरणा है जो छोटे गांवों से निकलकर आसमान छूने का जज्बा रखते हैं।
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