पटना। बिहार की राजनीति में सोमवार को एक बड़ा संवैधानिक बदलाव देखने को मिला। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने बिहार विधान परिषद (MLC) की सदस्यता छोड़ दी है। यह कदम उनके राज्यसभा के लिए निर्वाचित होने के बाद उठाया गया है।
नीतीश कुमार का विधान परिषद से इस्तीफा
मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने सोमवार को आधिकारिक तौर पर बिहार विधान परिषद से अपना इस्तीफा दे दिया। मुख्यमंत्री की ओर से उनका त्यागपत्र मंत्री विजय कुमार चौधरी और MLC संजय गांधी लेकर विधान परिषद सचिवालय पहुंचे। वहां उन्होंने सभापति अवधेश नारायण सिंह को इस्तीफा सौंपा।
मंत्री विजय चौधरी ने स्पष्ट किया कि यह एक संवैधानिक प्रक्रिया है। चूंकि नीतीश कुमार अब राज्यसभा के सदस्य निर्वाचित हो चुके हैं, इसलिए नियमानुसार उन्हें राज्य के सदन की सदस्यता छोड़नी पड़ी।

नितिन नवीन ने भी छोड़ी सदस्यता
सिर्फ नीतीश कुमार ही नहीं, बल्कि भाजपा नेता नितिन नवीन के इस्तीफे को लेकर बना सस्पेंस भी खत्म हो गया है। नितिन नवीन ने रविवार को ही अपना इस्तीफा भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष संजय सरावगी को भेज दिया था, जिसे सोमवार को आधिकारिक तौर पर जमा कर दिया गया। वे भी नीतीश कुमार के साथ राज्यसभा के लिए चुने गए हैं।
संवैधानिक मजबूरी और 14 दिनों का नियम
भारतीय संविधान के प्रावधानों के अनुसार, यदि कोई व्यक्ति विधान परिषद या विधानसभा का सदस्य रहते हुए संसद के किसी सदन (लोकसभा या राज्यसभा) के लिए चुना जाता है, तो उसे 14 दिनों के भीतर एक सदन से इस्तीफा देना अनिवार्य होता है। नीतीश कुमार और नितिन नवीन सहित NDA के कुल पांच सदस्य 16 मार्च को राज्यसभा के लिए निर्विरोध निर्वाचित हुए थे। इसी समय सीमा को ध्यान में रखते हुए यह फैसला लिया गया है।
क्या मुख्यमंत्री पद पर बना रहेगा संकट?
नीतीश कुमार के इस्तीफे के बाद सबसे बड़ा सवाल उनकी कुर्सी को लेकर था। इस पर विधानसभा अध्यक्ष डॉ. प्रेम कुमार ने स्थिति स्पष्ट की है। उन्होंने कहा कि संवैधानिक रूप से नीतीश कुमार अगले 6 महीनों तक बिना किसी सदन का सदस्य रहे भी मुख्यमंत्री पद पर बने रह सकते हैं। इस दौरान उन्हें फिर से किसी सदन की सदस्यता ग्रहण करनी होगी।
CM हाउस में हलचल और दिग्गजों का जमावड़ा
इस घटनाक्रम के बीच मुख्यमंत्री आवास पर सुबह से ही राजनीतिक सरगर्मी तेज रही। जेडीयू के कद्दावर नेता ललन सिंह, संजय झा और विजय चौधरी सुबह 9 बजे ही मुख्यमंत्री से मिलने पहुंच गए थे। वहीं, वरिष्ठ मंत्री बिजेन्द्र यादव भी मुलाकात कर बाहर निकले। माना जा रहा है कि पार्टी अब भविष्य की रणनीतियों और मंत्रिमंडल में संभावित बदलावों पर विचार कर रही है।
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