कुंदन कुमार/पटना। बिहार की राजनीति में एक महत्वपूर्ण संवैधानिक बदलाव के तहत मुख्यमंत्री ने विधान परिषद की सदस्यता से अपना इस्तीफा सौंप दिया है। विधान परिषद के सभापति अवधेश नारायण सिंह ने मुख्यमंत्री आवास जाकर उनसे मुलाकात की, जहां मुख्यमंत्री ने औपचारिक रूप से अपना त्यागपत्र उन्हें सौंपा। राज्यसभा के लिए निर्वाचित होने के कारण संवैधानिक नियमों के तहत उनका इस सदन से जाना अनिवार्य था।
सदन के लिए एक अपूरणीय क्षति
सभापति अवधेश नारायण सिंह ने इस विदाई पर गहरा दुख व्यक्त करते हुए कहा कि एक कुशल और कर्मठ सदस्य का सदन से जाना हमेशा खलेगा। उन्होंने भावुक मन से कहा, हमारे मन में यह टीस हमेशा रहेगी कि इतने योग्य सदस्य आज हमारे सदन का हिस्सा नहीं रहेंगे। हालांकि, राज्यसभा जाने की संवैधानिक प्रक्रिया के कारण यह इस्तीफा देना लाजिमी था।
विकास पुरुष के रूप में अमिट छाप
सभापति ने मुख्यमंत्री के कार्यकाल की सराहना करते हुए कहा कि बिहार की जनता और राज्य के विकास के लिए उनके द्वारा किए गए कार्यों को इतिहास में हमेशा याद रखा जाएगा। उन्होंने याद किया कि उनके सभापति रहते हुए मुख्यमंत्री का अधिकांश समय इसी सदन के सदस्य के रूप में बीता। उनके नेतृत्व में बिहार ने प्रगति के नए आयाम छुए हैं।
लोकतांत्रिक व्यवहार और सहज व्यक्तित्व
सदन के भीतर मुख्यमंत्री के व्यवहार की प्रशंसा करते हुए सभापति ने बताया कि वे सभी सदस्यों की बातों को बड़े धैर्य और बेलाग तरीके से सुनते थे। विपक्ष हो या पक्ष, सदन के सदस्यों की समस्याओं को वे प्राथमिकता के साथ सुलझाते थे। जब उनसे पूछा गया कि क्या इस्तीफे के वक्त मुख्यमंत्री असहज थे, तो सभापति ने स्पष्ट किया, वे एक दृढ़ व्यक्तित्व वाले व्यक्ति हैं। वे अपनी सोच और निर्णयों को लेकर पूरी तरह संतुष्ट हैं और उनके चेहरे पर किसी प्रकार की नाखुशी या असहजता नहीं थी।
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