बंगाल में चल रहे मतदाता सूची के स्पेशल इन्टेंसिव रिवीजन (SIR) को लेकर दाखिल याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने तृणमूल कांग्रेस की आपत्तियों पर फटकार लगाई है. लिस्ट से बाहर किए गए लाखों लोगों के दावों और आपत्तियों के मामलों की जांच के लिए अपीलेट ट्रिब्यूनल को चुनाव आयोग ट्रेनिंग दे रहा है, जिसका टीएमसी ने विरोध किया है. चुनाव आयोग के वकील दामा सेशाद्री नायडू ने बताया कि आज ट्रेनिंग दी जा रही है. कल से ट्रिब्यूनल का काम शुरू हो सकता है.
टीएमसी की ओर से सीनियर एडवोकेट कल्याण बनर्जी ने विरोध जताते हुए कहा कि अपीलेट ट्रिब्यूनल अर्ध न्यायिक निकाय है, उसको ट्रेनिंग देने की क्या जरूरत है.
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस विपुल एम. पंचौली की बेंच को चुनाव आयोग के वकील दामा सेशाद्री नायडू ने बताया कि आज ट्रेनिंग दी जा रही है. कल से ट्रिब्यूनल का काम शुरू हो सकता है. इस पर टीएमसी की ओर से सीनियर एडवोकेट कल्याण बनर्जी ने विरोध जताते हुए कहा, ‘अपीलेट ट्रिब्यूनल अर्ध न्यायिक निकाय है, उसको ट्रेनिंग देने की क्या जरूरत है.’
कल्याण बनर्जी की आपत्ति पर सीजेआई सूर्यकांत ने नाराजगी जताई और उनसे पूछा, ‘चुनाव आयोग नहीं तो काम की प्रकृति से उन्हें कौन अवगत करवाएगा. ट्रिब्यूनल में हाईकोर्ट के पूर्व चीफ जस्टिस होंगे. क्या आपको लगता है कि वह प्रभावित हो जाएंगे?’
लिस्ट से बाहर किए गए लोगों के दावों और आपत्तियों की जांच का काम डिस्ट्रिक्ट और सेशन कोर्ट के जज कर रहे हैं. कोर्ट ने इस बात पर भी नाराजगी जताई कि निष्पक्ष तरीके से SIR का काम कर रहे जजों को राजनीतिक ज्ञापन देकर परेशान किया जा रहा है. कोर्ट ने कहा कि जज जो कर रहे हैं, वह उनका काम नहीं है. उन्हें बेवजह परेशान नहीं किया जाना चाहिए.
जस्टिस बागची ने कहा, ‘हम सुनवाई इस बात पर कर रहे हैं कि चुनाव किस मतदाता सूची से हो. साथ ही, हमें देखना है कि नाम न होने के चलते अगर कोई इस चुनाव में मतदान न कर सके और उसे अपीलेट ट्रिब्यूनल से राहत मिले, तो वह भविष्य के लिए मतदाता सूची में जगह पा सके.’
सुप्रीम कोर्ट में ममता बनर्जी और टीएमसी समेत कई लोगों ने याचिकाएं दाखिल करके SIR प्रक्रिया में गड़बड़ी के गंभीर आरोप लगाए हैं. 28 फरवरी को फाइनल लिस्ट आ चुकी है, लेकिन करीब 50 लाख लोगों को लिस्ट में शामिल नहीं किया गया है. अब इन्हीं लोगों के दस्तावेजों की जांच चल रही है, जिसके बाद तय होगा कि किन-किन लोगों को वोटर लिस्ट में शामिल होने की मंजूरी मिलेगी.
पिछली सुनवाई में ममता बनर्जी के वकील ने कोर्ट से अपील की थी कि 6 अप्रैल को नामांकन की आखिरी तारीख है, उससे पहले ही लिस्ट को दुरुस्त कर दिया जाए क्योंकि नामांकन के बाद वोटर लिस्ट में बदलाव संभव नहीं है. याचिकाकर्ताओं की चिंता पर सीजेआई सूर्यकांत ने कहा, ‘हमें कलकत्ता हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस की रिपोर्ट मिली है. हर दिन 1,75,000 से 2 लाख दावों का निपटारा हो रहा है. लगभग 47 लाख का हो चुका है. 7 अप्रैल तक काम पूरा हो जाने की उम्मीद है.
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