दिल्ली में प्रधानमंत्री आवास पर PM मोदी की अध्यक्षता में बुधवार शाम 7 बजे कैबिनेट कमेटी ऑन सिक्योरिटी (CCS) की बैठक हुई। इसमें पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के कारण भारत में मौजूदा हालात की समीक्षा की गई। मीटिंग में अमित शाह, एस जयशंकर, निर्मला सीतारमण, पीयूष गोयल, शिवराज सिंह चौहान, जेपी नड्डा, अश्विनी वैष्णव, मनोहर लाल खट्टर, प्रल्हाद जोशी, किंजरापु राममोहन नायडू और हरदीप सिंह पुरी समेत कई केंद्रीय मंत्री शामिल रहे।
प्रधानमंत्री आवास पर पश्चिम एशिया संकट को लेकर सीसीएस की उच्चस्तरीय बैठक हुई. इसमें रक्षामंत्री, गृह मंत्री सहित कई वरिष्ठ मंत्री मौजूद रहे. बैठक में पिछली निर्णयों की समीक्षा हुई.
राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोभाल, PM के प्रमुख सचिव पी.के. मिश्रा और शक्तिकांत दास और कैबिनेट सचिव टी.वी. सोमनाथन भी मीटिंग में शामिल हुए। इस दौरान आम लोगों की जरूरी जरूरतों जैसे खाद्य, LPG और पेट्रोल-डीजल उपलब्धता पर चर्चा की गई।
पिछले 10 दिनों के भीतर CCS की यह दूसरी मीटिंग है। इससे पहले 23 मार्च को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने CCS मीटिंग की अध्यक्षता की थी। इसमें भारत पर पश्चिम एशिया में संघर्ष के प्रभाव को कम करने के उपायों का आकलन किया गया था।
कैबिनेट सचिव ने वैश्विक हालात पर एक डिटेल्ड प्रेजेंटेशन दिया और भारत सरकार के विभिन्न मंत्रालयों/विभागों द्वारा अब तक उठाए गए तथा आगे अपनाए जाने वाले उपायों की जानकारी दी। बैठक में कृषि, उर्वरक, खाद्य सुरक्षा, पेट्रोलियम, बिजली, एमएसएमई, निर्यातक, शिपिंग, व्यापार, वित्त, आपूर्ति श्रृंखला तथा अन्य प्रभावित क्षेत्रों पर संभावित प्रभाव और उनसे निपटने के उपायों पर चर्चा की गई।
PM ने कहा था कि यह समस्या लगातार बढ़ रही है और पूरी दुनिया इससे प्रभावित हो रही है। उन्होंने निर्देश दिया था कि सरकार के सभी विभाग मिलकर काम करें ताकि आम लोगों को कम से कम परेशानी हो। मीटिंग में गृह मंत्री अमित शाह, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर और अन्य अधिकारी मौजूद थे। कैबिनेट सचिव ने अब तक उठाए गए और प्रस्तावित कदमों की जानकारी दी थी।
इसके अलावा कृषि, उर्वरक, खाद्य सुरक्षा, पेट्रोलियम, बिजली, MSMEs, निर्यात, शिपिंग, व्यापार, वित्त और सप्लाई चेन जैसे विभिन्न क्षेत्रों पर संभावित प्रभाव और उससे निपटने के उपायों पर चर्चा हुई।
पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के वैश्विक अर्थव्यवस्था पर अल्पकालिक, मध्यम अवधि और दीर्घकालिक प्रभावों तथा भारत पर उसके संभावित असर का आकलन किया गया। इस संदर्भ में तत्काल और दीर्घकालिक दोनों प्रकार के प्रतिरोधात्मक उपायों पर चर्चा हुई।
प्रधानमंत्री ने कहा कि यह संघर्ष लगातार बदलती स्थिति है और पूरी दुनिया किसी न किसी रूप में इससे प्रभावित हो रही है। ऐसे समय में यह सुनिश्चित करने के लिए हर संभव प्रयास किया जाना चाहिए कि नागरिकों पर इसका न्यूनतम प्रभाव पड़े। प्रधानमंत्री ने निर्देश दिया कि सरकार के सभी अंग मिलकर काम करें ताकि नागरिकों को कम से कम असुविधा हो।
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