Rajasthan News: राजस्थान की सियासत में इन दिनों स्थानीय निकाय और पंचायत चुनावों को लेकर तलवारें खिंच गई हैं। पीसीसी चीफ गोविंद सिंह डोटासरा ने राज्य सरकार पर बड़ा हमला बोलते हुए आरोप लगाया है कि सरकार चुनाव कराने की मंशा ही नहीं रखती और जानबूझकर लोकतंत्र का गला घोंटा जा रहा है।

डोटासरा का वार- प्रशासकों के भरोसे चल रही सरकार

दरअसल, ओबीसी कमीशन (OBC Commission) का कार्यकाल सितंबर तक बढ़ाए जाने पर डोटासरा बुरी तरह उखड़ गए हैं। उन्होंने फील्ड से मिल रही फीडबैक का हवाला देते हुए कहा कि नवंबर 2024 से ही 59 नगर परिषद और पालिकाओं के चुनाव पेंडिंग पड़े हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदेश में आज एक भी ऐसी पालिका नहीं बची है जहां जनता द्वारा चुना हुआ प्रतिनिधि बैठा हो। डोटासरा के मुताबिक, सरकार ने सभी निकायों में अपने प्रशासक’ बैठा दिए हैं, जिससे विकास कार्य पूरी तरह ठप हो गए हैं। उन्होंने कहा कि करीब 15 जिले और 112 पंचायत समितियों का कार्यकाल भी पूरा होने वाला है, लेकिन सरकार चुनाव को लेकर चुप्पी साधे हुए है।

कोर्ट की अवमानना करेगी सरकार

गौरतलब है कि राजस्थान हाई कोर्ट ने स्थानीय निकायों के चुनाव 15 अप्रैल से पहले कराने के निर्देश दिए थे। पीसीसी चीफ ने चेतावनी दी है कि अगर तय समय पर चुनाव नहीं हुए, तो यह सीधा-सीधा कोर्ट की अवमानना का मामला बनेगा। डोटासरा का सीधा आरोप है कि ओबीसी आयोग की रिपोर्ट तैयार है, लेकिन सरकार इसे जानबूझकर स्वीकार नहीं कर रही, क्योंकि चुनाव होते ही सरकार की पोल खुल जाएगी।

वन स्टेट-वन इलेक्शन की तैयारी

डोटासरा के इन तीखे हमलों पर भाजपा के प्रदेश मुख्य प्रवक्ता रामलाल शर्मा ने भी मोर्चा संभाला। उन्होंने डोटासरा के आरोपों को अहंकार की भाषा करार दिया। भाजपा का कहना है कि आयोग का कार्यकाल बढ़ाना एक सामान्य कानूनी प्रक्रिया है। सरकार की मंशा वन स्टेट–वन इलेक्शन के जरिए एक साथ चुनाव कराने की है। जैसे ही ओबीसी कमीशन का काम पूरा होगा, चुनावों का बिगुल फूंक दिया जाएगा।

नगर पालिकाओं और पंचायतों में जनप्रतिनिधि न होने का सीधा असर आम आदमी पर पड़ रहा है। रायपुर से लेकर जयपुर तक के सियासी गलियारों में चर्चा है कि पार्षदों और सरपंचों के अभाव में छोटे-छोटे कामों (नाली, सड़क, लाइट) के लिए लोगों को दफ्तरों के चक्कर काटने पड़ रहे हैं। अगर 15 अप्रैल तक चुनाव की घोषणा नहीं होती, तो राजस्थान की राजनीति में कानूनी दांवपेच का नया दौर शुरू हो सकता है।

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