मिडिल ईस्ट में जारी संघर्ष अब और गंभीर रूप लेता दिख रहा है। शुक्रवार को ईरान ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के पास अमेरिकी वायुसेना के A-10 थंडरबोल्ट विमान को मार गिराने का दावा किया है। बताया जा रहा है कि एक सप्ताह के भीतर यह दूसरा मामला है, जब ईरान ने अमेरिका के अत्याधुनिक सैन्य विमान को निशाना बनाया है। इससे पहले भी ईरान ने एक F-15 फाइटर जेट को मार गिराने का दावा किया था। इस घटनाक्रम से क्षेत्र में तनाव और बढ़ने की आशंका है, क्योंकि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज वैश्विक तेल आपूर्ति का एक अहम मार्ग है। यहां किसी भी तरह का सैन्य टकराव अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार और व्यापार पर सीधा असर डाल सकता है।

रिपोर्ट के मुताबिक, हमले के बाद पायलट ने सूझबूझ दिखाते हुए विमान को कुवैत के हवाई क्षेत्र की ओर मोड़ा और किसी तरह वहां पहुंचने में सफल रहा। इसके बाद उसने सुरक्षित तरीके से विमान से बाहर निकलकर अपनी जान बचाई। विमान कुवैत की सीमा में दुर्घटनाग्रस्त हो गया, जबकि पायलट पूरी तरह सुरक्षित बताया जा रहा है।

ईरानी सेना ने भी अल जजीरा के माध्यम से इस हमले की पुष्टि की है। यह घटना ऐसे समय में हुई है जब अमेरिका पहले से ही अपने लापता चालक दल के सदस्यों की तलाश में सर्च एंड रेस्क्यू ऑपरेशन चला रहा था।

ब्लैकहॉक हेलीकॉप्टर को बनाया निशाना

फाइटर जेट पर हमले के बाद अब ईरान की आक्रामकता रेस्क्यू मिशन तक फैल गई है। रिपोर्ट के अनुसार, बचाव अभियान में जुटे दो UH-60 ब्लैकहॉक हेलीकॉप्टरों पर भी हमला किया गया। हालांकि इस हमले में कुछ सदस्यों को मामूली चोटें आई हैं, लेकिन आधिकारिक तौर पर सभी को सुरक्षित बताया गया है।

इससे पहले, ईरान ने अमेरिकी A-10 थंडरबोल्ट विमान को निशाना बनाया था, जिसमें पायलट किसी तरह कुवैत के हवाई क्षेत्र में पहुंचकर सुरक्षित बाहर निकलने में सफल रहा। वहीं, इससे पहले मार गिराए गए F-15 फाइटर जेट के दो चालक दल के सदस्यों में से अब तक केवल एक को ही बचाया जा सका है, जबकि दूसरे की तलाश जारी है।

राष्ट्रपति ट्रंप बोले- यह युद्ध है

मिडिल ईस्ट में बढ़ते सैन्य टकराव के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बड़ा बयान दिया है। हाल ही में अमेरिकी विमानों पर हुए हमलों के बाद पहली बार प्रतिक्रिया देते हुए ट्रंप ने साफ कहा कि मौजूदा हालात “युद्ध की स्थिति” हैं। इंटरव्यू में जब उनसे पूछा गया कि क्या इन घटनाओं का ईरान के साथ चल रही कूटनीतिक बातचीत पर असर पड़ेगा, तो उन्होंने दोटूक जवाब दिया, “नहीं, बिल्कुल नहीं। यह युद्ध है। हम एक युद्ध में हैं।” ट्रंप का यह बयान ऐसे समय में आया है जब ईरान द्वारा अमेरिकी A-10 थंडरबोल्ट और F-15 फाइटर जेट को निशाना बनाने के दावे सामने आए हैं। साथ ही, बचाव अभियान में जुटे UH-60 ब्लैकहॉक हेलीकॉप्टरों पर भी हमले की खबरें हैं।

ईरान द्वारा अमेरिकी विमानों को निशाना बनाने की घटनाएं जिस क्षेत्र में हो रही हैं, वह दुनिया के सबसे अहम समुद्री मार्गों में से एक स्ट्रेट ऑफ होर्मुज है। यह जलमार्ग वैश्विक तेल और गैस सप्लाई का प्रमुख रास्ता माना जाता है। लगातार हमलों और संभावित नाकेबंदी के कारण वैश्विक ऊर्जा बाजार में भारी अनिश्चितता पैदा हो गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह मार्ग प्रभावित होता है, तो इसका असर पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा।

भारत पर असर क्यों गंभीर?

भारत जैसे देशों के लिए स्थिति और भी चिंताजनक है, क्योंकि देश अपनी एलपीजी (LPG) और कच्चे तेल की बड़ी मात्रा के लिए इसी मार्ग पर निर्भर है। सप्लाई बाधित होने से कुकिंग गैस की कमी हो सकती है  तेल की कीमतों में तेजी आने की आशंका घरेलू स्तर पर महंगाई बढ़ने का खतरा हाल के दिनों में कई भारतीय एलपीजी टैंकरों के इस मार्ग से गुजरने में दिक्कतें आई हैं, हालांकि कुछ जहाज सुरक्षित निकलने में सफल भी रहे हैं।

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