Rajasthan News: राजस्थान की राजनीति में इन दिनों विकास के मुद्दों से ज्यादा चर्चा उम्र और रिटायरमेंट की हो रही है। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़ और पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के बीच छिड़ी जुबानी जंग अब और ज्यादा कड़वाहट भरी हो गई है। राठौड़ ने गहलोत को संन्यास लेने की सलाह देते हुए उनके स्वभाव को लेकर जो शब्द कहे हैं, उससे प्रदेश का सियासी पारा सातवें आसमान पर है।

उम्र का असर दिखने लगा है

दरअसल, विवाद की शुरुआत तब हुई जब मदन राठौड़ ने कहा कि अशोक गहलोत अब 75 की उम्र पार कर चुके हैं और उन्हें संतोषशास्त्र अपनाते हुए नई पीढ़ी के लिए रास्ता छोड़ देना चाहिए। सूत्रों के अनुसार, राठौड़ ने यहां तक कह दिया कि उम्र की वजह से गहलोत का शब्द चयन बिगड़ने लगा है और जब कोई सनकी स्वभाव का होने लगे और विवेक शून्य हो जाए, तो समझ लेना चाहिए कि संन्यास का समय आ गया है।

गहलोत ने सीधे मोदी और भागवत को लपेटा

बता दें कि इस निजी हमले पर अशोक गहलोत ने भी करारा पलटवार किया। उन्होंने भाजपा के ही नियमों पर सवाल उठाते हुए कहा कि अगर राजनीति में संन्यास का कोई नियम है, तो वह पीएम नरेंद्र मोदी और RSS प्रमुख मोहन भागवत पर भी लागू होना चाहिए। गहलोत ने दोहराया कि वे महात्मा गांधी की तरह 100 साल की उम्र तक देश और प्रदेश की सेवा करना चाहते हैं।

राठौड़ ने कहा- दिमाग चलना जरूरी

गौरतलब है कि गहलोत के जवाब के बाद मदन राठौड़ चुप नहीं बैठे। उन्होंने फिर से हमला करते हुए कहा कि 100 साल तक वह काम कर सकता है जिसका शरीर और दिमाग व्यवस्थित हो। उन्होंने तंज कसा कि गहलोत के पास अब कोई काम नहीं बचा है, इसलिए वे केवल बयानों की सीरीज चलाकर खुद को व्यस्त रख रहे हैं।

इस पूरे बवाल के बीच भाजपा सांसद घनश्याम तिवाड़ी ने बीच का रास्ता निकाला। उन्होंने कहा कि राजनीति में रिटायरमेंट का कोई फिक्स फॉर्मूला नहीं है। उन्होंने मोहन भागवत का उदाहरण देते हुए कहा कि यदि गहलोत सेवा करना चाहते हैं तो अच्छी बात है, भगवान उन्हें लंबी उम्र दे।

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