अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान से सीजफायर के बीच NATO देशों पर एक बार फिर बड़ा हमला बोला है. उन्होंने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट साझा कर कहा है कि NATO तब भी नहीं था जब हमें उनकी जरूरत थी और NATO आगे भी तब हमारे साथ नहीं होगा जब हमें उनकी जरूरत होगी. आपको ग्रीन लैंड तो याद है ना वही जो बर्फ का एक बड़ा सा टुकड़ा है. आपको बता दें कि ये कोई पहला मौका नहीं है जब ट्रंप ने NATO देशों पर निशाना साधा हो. उन्होंने गुरुवार सुबह भी एक सोशल मीडिया पोस्ट किया था. इस पोस्ट में भी ट्रंप ने न सिर्फ NATO सहयोगियों पर तीखा हमला बोला था बल्कि ग्रीनलैंड को लेकर अपनी पुरानी महत्वाकांक्षा को भी जाहिर किया था. उनके बयान से साफ संकेत मिल रहा है कि युद्धविराम के बाद अमेरिका की रणनीति अब नए भू-राजनीतिक मोर्चों की ओर मुड़ रही है.

ईरान युद्धविराम के बाद बदला फोकस

हाल ही में ईरान के साथ संघर्ष के बाद हुए युद्धविराम ने अमेरिका को राहत जरूर दी है, लेकिन इसके तुरंत बाद ट्रंप का आक्रामक रुख फिर सामने आ गया. ट्रंप ने दावा किया कि ‘ऑपरेशन एपिक फ्यूरी’ के दौरान अमेरिका को अपने सहयोगियों से अपेक्षित समर्थन नहीं मिला. उनका यह बयान सीधे तौर पर पश्चिमी सैन्य गठबंधन की एकता पर सवाल खड़ा करता है. खासकर ऐसे समय में जब वैश्विक सुरक्षा चुनौतियां बढ़ रही हैं.

ग्रीनलैंड पर ट्रंप की नजर पुरानी

ट्रंप के बयान का सबसे चौंकाने वाला हिस्सा था ग्रीनलैंड को लेकर उनकी टिप्पणी. उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा, ‘ग्रीनलैंड को याद रखो, वह विशाल, अव्यवस्थित ढंग से प्रबंधित बर्फ का टुकड़ा.’ यह कोई सामान्य टिप्पणी नहीं है. यह सीधे तौर पर उस विवादित प्रस्ताव की ओर इशारा है, जब ट्रंप ने डेनमार्क से ग्रीनलैंड खरीदने की बात कही थी. जिसे डेनमार्क ने साफ तौर पर खारिज कर दिया था.

इससे पहले खबर आई थी कि ट्रंप NATO से बाहर निकलने का मूड बना रहे हैं. ब्रिटिश अखबार ‘द टेलीग्राफ’ को ट्रंप ने इंटरव्यू दिया था. इसमें ट्रंप ने कहा था कि वह NATO से अमेरिका को बाहर निकालने पर गंभीरता से विचार कर रहे हैं. ट्रंप ने इंटरव्यू के दौरान NATO का ‘कागजी शेर’ बताया और दावा किया कि यूके के पास कोई नेवी नहीं है.

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