Rajasthan Politics: राजस्थान की पूर्व मुख्यमंत्री और भाजपा की कद्दावर नेता वसुंधरा राजे सिंधिया जब भी मंच पर आती हैं, तो उनके बयानों के कई सियासी मायने निकाले जाते हैं। लेकिन इस बार झालावाड़ के कामखेड़ा धाम में जो हुआ, उसने सबको चौंका दिया है। अपने बेटे सांसद दुष्यंत सिंह की जन संवाद यात्रा को हरी झंडी दिखाने पहुंची राजे ने अचानक कुछ ऐसा कह दिया, जिससे चर्चाओं का बाजार गर्म हो गया है।

मंच से छलका दर्द या था कोई इशारा?

दरअसल, यात्रा को रवाना करने से पहले राजे करीब 20 मिनट तक जनता को संबोधित कर रही थीं। भाषण के अंत में उन्होंने एक ऐसी बात कही जो अब सोशल मीडिया पर आग की तरह फैल रही है। वसुंधरा ने कहा, कल जब मैं झालावाड़ आई, तो कुछ लोगों ने मुझे काम बताए और सहयोग मांगा। लेकिन मैंने उनसे कह दिया कि… मैं तुम्हारे लिए क्या कर सकती हूं, मैं तो अपने आप को खुद ही नहीं बचा पाई, मेरा ही सब कुछ चला गया।

पंडाल में गूंजे ठहाके, पर मायने हैं गंभीर

बता दें कि वसुंधरा ने जैसे ही यह बात कही, पूरा पंडाल ठहाकों से गूंज उठा। हालांकि, राजे ने मुस्कुराते हुए यह बात कही, लेकिन राजनीति के जानकार इसे दिल्ली और जयपुर की मौजूदा सियासी स्थिति से जोड़कर देख रहे हैं। गौरतलब है कि पिछले कुछ समय से राजस्थान भाजपा के भीतर जिस तरह के सत्ता परिवर्तन हुए हैं, यह बयान उसी ओर एक चुटीला इशारा माना जा रहा है।

सूत्रों ने बताया कि इस बयान से पहले वसुंधरा ने स्थानीय लोगों के साथ अपने पुराने रिश्तों को याद किया। उन्होंने कहा कि लोग शिकायतें लेकर आते हैं क्योंकि वे हमें अपना मानते हैं। किसी को मकान चाहिए तो किसी को पानी। राजे ने भावुक होते हुए कहा, यहां के लोगों ने हमें बहुत प्यार दिया है और हमेशा कदम से कदम मिलाकर चले हैं। यह साथ आगे भी बना रहना चाहिए।

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