Great Indian Bustard: राजस्थान के शान कहे जाने वाले राज्य पक्षी ग्रेट इंडियन बस्टर्ड (गोडावण) के संरक्षण को लेकर साल 2026 की सबसे बड़ी और सुखद खबर सामने आई है। दरअसल, जैसलमेर के सम और रामदेवरा स्थित ब्रीडिंग सेंटर में इस सीजन के पहले ही महीने में 11 नए चूजों का जन्म हुआ है। गौरतलब है कि इस सफलता के साथ ही अब ब्रीडिंग सेंटर में गोडावणों का कुनबा बढ़कर 79 हो गया है।

नेचुरल और AI तकनीक का डबल डोज

सूत्रों ने बताया कि इन 11 चूजों का जन्म किसी चमत्कार से कम नहीं है। इसमें वैज्ञानिकों की मेहनत और आधुनिक तकनीक का बड़ा हाथ है। 8 चूजे कृत्रिम गर्भाधान तकनीक से पैदा हुए हैं। 3 चूजों का जन्म प्राकृतिक तरीके से हुआ है। इस सीजन का पहला नन्हा चूजा 10 मार्च को अंडे से बाहर आया था।

2019 से शुरू हुआ था मिशन

ग्राउंड सूत्रों के अनुसार, गोडावण को विलुप्त होने से बचाने के लिए साल 2019 में यह खास प्रोग्राम शुरू किया गया था। तब से लेकर अब तक जंगली अंडों से लाए गए 33 संस्थापक पक्षियों की मदद से कुल 46 नए चूजे तैयार किए जा चुके हैं। डेजर्ट नेशनल पार्क के अधिकारी बृजमोहन गुप्ता ने बताया कि यह कामयाबी उम्मीद से कहीं अधिक है और वाइल्ड लाइफ इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया (WII) की टीम इसे बड़ी उपलब्धि मान रही है।

अब होगा घर वापसी का अगला चरण

विशेषज्ञों का कहना है कि यह प्रोजेक्ट अब अपने सबसे महत्वपूर्ण पड़ाव पर पहुंच गया है। बता दें कि सेंटर में इनकी संख्या पर्याप्त होने के बाद अब इन्हें वापस इनके प्राकृतिक आवास यानी खुले जंगलों में छोड़ने की तैयारी की जा रही है। इससे आने वाले समय में जैसलमेर के धोरों में गोडावणों की संख्या फिर से पहले जैसी नजर आएगी।

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