प्रदीप मालवीय, उज्जैन। विश्व प्रसिद्ध ज्योतिर्लिंग भगवान श्री महाकालेश्वर के दरबार में आस्था के कई रंग देखने को मिलते हैं, लेकिन मंगलवार दोपहर एक ऐसा वाकया सामने आया जिसने वहां मौजूद हर श्रद्धालु की आंखें नम कर दीं। सीहोर से आए महाकाल के एक नन्हे ‘हठीले भक्त’ की तड़प देखकर स्वयं मंदिर प्रबंधन को भी नियमों में ढील देनी पड़ी।
दरअसल, सीहोर से शिल्पी गुप्ता अपने भाई भगत के साथ उज्जैन महाकाल दर्शन के लिए पहुंची थीं। भगत के मन में बाबा महाकाल को नजदीक से निहारने और उन्हें जल अर्पित करने की गहरी इच्छा थी। मंदिर में भीड़ के कारण जब वह बैरिकेड्स से दर्शन कर रहा था और गर्भगृह के पास नहीं पहुंच पाया, तो उसका सब्र टूट गया । बाबा से दूरी बर्दाश्त न हुई और भक्त की आंखों से अविरल आंसू बहने लगे।
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भक्त की यह निश्छल तड़प और अनन्य आस्था वहां तैनात महाकाल मंदिर प्रबंध समिति के कर्मचारियों और जिम्मेदारों की नजरों से छिप न सकी। भक्त का रोना देख अधिकारियों का दिल पसीज गया और उन्होंने तुरंत उसे सम्मानपूर्वक चांदी द्वार तक ले जाने का निर्णय लिया।
शिल्पी गुप्ता ने बताया कि समिति के सहयोग से भगत ने न केवल चांदी द्वार से बाबा महाकाल को जल अर्पित किया, बल्कि शांतिपूर्ण ढंग से दिव्य दर्शनों का लाभ भी उठाया। यह घटना सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बनी हुई है, जो यह सिद्ध करती है कि महादेव केवल नियमों से नहीं, बल्कि भक्त की सच्ची पुकार से प्रसन्न होते हैं।
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