रायपुर। छत्तीसगढ़ के सक्ती जिले में वेदांता पावर प्लांट हादसे में प्रबंधन की लापरवाही सामने आई है। पुलिस ने वेदांता गुप के चेयरमैन अनिल अग्रवाल, प्लांट हेड देवेंद्र पटेल समेत 19 लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज किया है। वहीं इस मामले में पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने ट्वीट कर कहा है कि सक्ती में 20 लोगों की दर्दनाक मौत पर एफआईआर हो गई है‌, लेकिन सरकार इस FIR को सार्वजनिक नहीं कर रही है।

भूपेश बघेल ने कहा है कि प्रदेश की जनता को जानने का हक है कि किनके खिलाफ किन धाराओं में रिपोर्ट दर्ज हुई है। पहले इसी वेदांता कंपनी में हुए हादसे में तकरीबन 40 लोगों की मौत हुई थी पर तत्कालीन भाजपा सरकार ने लीपापोती कर दी थी। कंपनी के मालिकों और ठेकेदार को रमन सरकार ने बचा लिया था। ऐसा अबकी बार नहीं होना चाहिए। चाहे कोई कितना भी बड़ा हो, दोषियों पर कार्रवाई होनी ही चाहिए।

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बता दें कि वेदांता पावर प्लांट में 14 अप्रैल को हुए बॉयलर ब्लास्ट में अब तक 20 मजदूरों की मौत हुई है, जबकि 16 घायलों का अलग-अलग अस्पतालों में इलाज जारी है। प्रशासन की ओर से जारी सूची के अनुसार हादसे में जान गंवाने वालों में 5 लोग छत्तीसगढ़ के निवासी हैं, जबकि 15 मृतक अन्य राज्यों से हैं।

तकनीकी जांच में क्या सामने आया?

पुलिस और प्रशासन की प्रारंभिक जांच रिपोर्ट के अनुसार, बायलर के फर्नेस में अत्यधिक ईंधन जमा हो जाने से दबाव असामान्य रूप से बढ़ गया था। इसी दबाव के कारण बायलर का निचला पाइप अपनी जगह से हट गया और विस्फोट हो गया। वहीं फोरेंसिक टीम (एफएसएल) ने भी अपनी रिपोर्ट में अत्यधिक ईंधन संचय और दबाव को हादसे की मुख्य वजह बताया है।

गंभीर लापरवाही के आरोप

शुरुआती जांच में यह भी सामने आई है कि प्लांट में मशीनरी के रख-रखाव और संचालन के मानकों का सही तरीके से पालन नहीं किया गया। सुरक्षा उपायों में कमी और निगरानी की लापरवाही के चलते यह बड़ा हादसा हुआ, जिसके कारण 20 श्रमिकों की मौत हो गई। घायल 14 श्रमिकों का अभी ईलाज जारी है।

जांच के लिए बनी है विशेष टीम

सक्ती जिले के पुलिस अधीक्षक प्रफुल्ल ठाकुर ने बताया कि अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक के नेतृत्व में एक विशेष जांच टीम गठित की गई है, जिसमें पुलिस और फोरेंसिक विशेषज्ञ शामिल हैं। यह टीम तकनीकी पहलुओं की गहराई से जांच कर रही है।

सीएम ने मजिस्ट्रियल जांच के दिए हैं निर्देश

इस घटना की मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने मजिस्ट्रियल जांच के निर्देश दिए हैं। जांच में जो भी दोषी होंगे उन पर श्रम कानून के तहत कड़ी कार्रवाई की जाएगी। वहीं मुख्यमंत्री साय ने मृतकों के परिवार वालों को 5-5 लाख रुपए और घायलों को 50 हजार रुपए देने का ऐलान किया है। PMO ने भी मुआवजे की घोषणा की है। PMNRF से हर मृतकों के परिवार वालों को 2 लाख और घायलों को 50 हजार रुपए दिए जाएंगे।

मृतक के परिजन को 35-35 लाख और नौकरी देगी कंपनी

बता दें कि रायगढ़ के अलग-अलग अस्पतालों में 11 घायलों का इलाज चल रहा है। रायगढ़ के बालाजी मेट्रो हॉस्पिटल में बनवारी लाल, उपेंद्र और परदेशी लाल चंद्रा का इलाज जारी है। वहीं 2 मजदूर उमेंद्र और किस्मत अली का रायपुर के निजी अस्पताल में इलाज चल रहा है। वेदांता प्रबंधन ने मृतक के परिजन को 35-35 लाख रुपए सहायता राशि और नौकरी देने का ऐलान किया है। वहीं घायलों को 15-15 लाख रुपए देने की बात कही है।

हादसे में इन लोगों की हुई है मौत –