Lifestyle Desk : गर्मी आते ही पाचन से जुड़ी समस्याएं बढ़ना सिर्फ “गलत खाना” खाने की वजह से नहीं होता—इसमें मौसम का बड़ा रोल होता है. इन दिनों पारा बहुत तेज़ी से बढ़ रहा है और तापमान 40 डिग्री के भी पार चला जा रहा है. ऐसे में हमारे शरीर, खासकर गट (आंतों) का वातावरण तापमान और नमी के साथ बदलता है, जिससे कई तरह की दिक्कतें शुरू हो जाती हैं. आइए जानते हैं इसके कारण और बचाव के उपाय.

गर्मियों में पेट की समस्याएं क्यों बढ़ती हैं?

बैक्टीरिया तेजी से बढ़ते हैं
उच्च तापमान में खाने-पीने की चीजों में बैक्टीरिया जल्दी पनपते हैं. इससे फूड पॉइजनिंग और डायरिया का खतरा बढ़ जाता है.

पानी की कमी (डिहाइड्रेशन)
गर्मी में ज्यादा पसीना निकलने से शरीर में पानी और इलेक्ट्रोलाइट्स की कमी हो जाती है, जिससे पाचन धीमा हो सकता है और एसिडिटी या कब्ज/डायरिया हो सकता है.

गट माइक्रोबायोम पर असर
मौसम बदलने से आंतों में मौजूद “अच्छे बैक्टीरिया” का संतुलन बिगड़ सकता है, जिससे गैस, ब्लोटिंग और इंफेक्शन की संभावना बढ़ती है.

बाहर का खाना और स्ट्रीट फूड
गर्मी में बाहर का खुला या अधपका खाना जल्दी खराब होता है, जो पेट के लिए नुकसानदायक हो सकता है.

बचाव के आसान उपाय

हाइड्रेशन बनाए रखें
दिनभर पर्याप्त पानी पिएं. ORS, नारियल पानी, छाछ और नींबू पानी भी फायदेमंद हैं.

ताजा और हल्का भोजन करें
भारी, तला-भुना और मसालेदार खाने से बचें. घर का ताजा बना खाना खाएं.

प्रोबायोटिक्स शामिल करें
दही, छाछ जैसे खाद्य पदार्थ गट हेल्थ को बेहतर बनाए रखते हैं.

साफ-सफाई का ध्यान रखें
खाने से पहले हाथ धोना, फल-सब्जियां अच्छी तरह साफ करना बहुत जरूरी है.

स्ट्रीट फूड से सावधानी
खासकर गर्मी में खुले में बिकने वाले कटे फल, चाट आदि से बचें.

इलेक्ट्रोलाइट बैलेंस बनाए रखें
सिर्फ पानी ही नहीं, नमक-शक्कर का संतुलन भी जरूरी है ताकि शरीर ठीक से काम कर सके.

कब डॉक्टर से मिलें?

अगर बार-बार दस्त हो, तेज बुखार आए, उल्टी के साथ कमजोरी महसूस हो या डिहाइड्रेशन के लक्षण दिखें, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें. गर्मी में गट हेल्थ का ध्यान रखना बेहद जरूरी है. थोड़ी सावधानी और सही खान-पान अपनाकर आप इन समस्याओं से काफी हद तक बच सकते हैं.