रविंद्र कुमार भारद्वाज,रायबरेली। शहर के निवासियों को पिछले कई दिनों से रसोई गैस (एलपीजी सिलेंडर) की कमी का सामना करना पड़ रहा है। शहर के गोरा बाजार स्थित कुमार गैस एजेंसी पर सुबह से ही उपभोक्ताओं की लंबी कतारें लगी हुई हैं। लोग खाली सिलेंडर लेकर घंटों खड़े रहते हैं, लेकिन कई को रिफिल नहीं मिल पा रहा।
यह समस्या केवल रायबरेली तक सीमित नहीं, बल्कि उत्तर प्रदेश के कई जिलों जैसे सीतापुर, लखीमपुर खीरी, नोएडा आदि में भी देखी जा रही है।मुख्य कारण मध्य पूर्व (ईरान-अमेरिका-इजराइल युद्ध) का है। ईरान द्वारा स्ट्रेट ऑफ होर्मुज प्रभावित होने से एलपीजी आयात में देरी हुई है।
वेटिंग पीरियड 21 से बढ़कर 25 दिन
भारत अपनी एलपीजी जरूरत का लगभग दो-तिहाई हिस्सा आयात करता है, जिसमें मध्य पूर्व का योगदान 85-90% है। इससे पैनिक बाइंग बढ़ गई – लोग पहले से ज्यादा सिलेंडर बुक कर रहे हैं, जिससे डिमांड अचानक उछल गई। सरकार ने स्थिति संभालने के लिए कदम उठाए हैं। रिफाइनरियों को अधिक एलपीजी उत्पादन के आदेश दिए गए हैं। घरेलू सिलेंडर की कीमत में ₹60 की बढ़ोतरी हुई (अब दिल्ली में ₹913), जबकि कमर्शियल में ₹115। रिफिल के लिए न्यूनतम वेटिंग पीरियड 21 से बढ़ाकर 25 दिन कर दिया गया है, ताकि होर्डिंग रोकी जा सके।
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कोई वास्तविक कमी नहीं
अधिकारियों का कहना है कि देश में पर्याप्त स्टॉक है, कोई वास्तविक कमी नहीं – केवल precautionary buying से अस्थायी दबाव है।उपभोक्ताओं का कहना है कि रोजमर्रा की रसोई चलाना मुश्किल हो गया। महिलाएं और परिवार सुबह से शाम तक एजेंसी के चक्कर काट रहे हैं। कुछ जगहों पर ब्लैक मार्केट में सिलेंडर ₹1500 तक बिक रहे हैं।
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