पंचांग के अनुसार, मासिक कृष्ण जन्माष्टमी 11 मार्च, बुधवार को मनाई जाएगी. इस दिन भगवान श्रीकृष्ण की पूजा निशा काल में की जाती है. इसलिए 11 मार्च को ही व्रत और पूजा का विधान माना गया है. चैत्र माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि 11 मार्च को देर रात 1.54 मिनट पर शुरू होगी और 12 मार्च को सुबह 4.19 मिनट पर समाप्त होगी.

दुर्लभ योग का संयोग
ज्योतिषियों के अनुसार इस बार मासिक कृष्ण जन्माष्टमी पर दुर्लभ सिद्धि योग और शिववास योग का संयोग बन रहा है. सिद्धि योग का संयोग सुबह 9.12 मिनट से रहेगा, जबकि शिववास योग का प्रभाव रात भर माना गया है. इन शुभ योगों में भगवान श्रीकृष्ण और राधा रानी की पूजा करने से साधक को मनचाहा फल मिलने की मान्यता है.
धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस दिन व्रत रखने और भगवान श्रीकृष्ण की पूजा करने से पापों का नाश होता है. मनोकामनाएं पूरी होती हैं. साथ ही मोक्ष प्राप्ति का मार्ग भी प्रशस्त होता है. इस दिन व्रत रखने के साथ भगवान श्रीकृष्ण के मंत्रों का जाप करना भी अत्यंत फलदायी माना गया है.
इन मंत्रों का करें जाप
ॐ कृष्णाय नमः
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे।
हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे।।
ॐ श्री कृष्णः शरणं ममः।
ॐ देवकीनन्दनाय विधमहे वासुदेवाय धीमहि तन्नो कृष्णः प्रचोदयात।
ॐ नमो भगवते तस्मै कृष्णाय कुण्ठमेधसे। सर्वव्याधि विनाशाय प्रभो माममृतं कृधि।।
कथा सुनने का है विशेष महत्व
साल में 12 बार मासिक कृष्ण जन्माष्टमी आती है, क्योंकि यह हर महीने कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को मनाई जाती है. इस दिन भक्त बाल गोपाल की पूजा करते हैं और उनकी कथा सुनना या पढ़ना दोनों ही पवित्र माना जाता है. जो लोग कथा पढ़ नहीं पाते, वे कथा सुनकर भी समान पुण्य प्राप्त करते हैं.
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