अतीश दीपंकर/भागलपुर। जिले के चर्चित प्रॉपर्टी डीलर ऋषभ झा हत्याकांड का पुलिस ने महज 48 घंटों के भीतर खुलासा कर दिया है। पुलिस जांच में यह बात सामने आई है कि इस सनसनीखेज वारदात का मास्टरमाइंड कोई और नहीं, बल्कि ऋषभ का करीबी दोस्त ही था।
दोस्ती में दगा
वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP) प्रमोद कुमार ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि ऋषभ झा और मुख्य आरोपी सौरभ साह उर्फ मयंक गुप्ता मिलकर प्लॉटिंग का कारोबार करते थे। ऋषभ के काफी पैसे सौरभ के पास बकाया थे, जिसे वह लौटाना नहीं चाहता था। इसी बकाया रकम को हड़पने की नीयत से सौरभ ने अपने चार साथियों के साथ मिलकर ऋषभ की हत्या की खौफनाक साजिश रची।
लूडो खेलने के बहाने बुलाया, फिर मारी गोली
साजिश के तहत 9 मार्च को सौरभ ने ऋषभ को लूडो खेलने के बहाने सुंदरपुर स्थित भानु कुमार के टेंट गोदाम पर बुलाया। वहां पहले से ही सौरभ के अन्य साथी मौजूद थे। मौका मिलते ही आरोपियों ने ऋषभ को गोली मार दी। घटना को दुर्घटना का रूप देने के लिए अपराधियों ने ही उसे अस्पताल में भर्ती कराया और पुलिस को गुमराह करने के लिए मनगढ़ंत कहानी सुनाई।
48 घंटे में पुलिस की कार्रवाई और गिरफ्तारी
पुलिस ने तकनीकी साक्ष्यों और वैज्ञानिक जांच के आधार पर टीम गठित की और 48 घंटे के भीतर पांचों आरोपियों को धर दबोचा। पकड़े गए अपराधियों की पहचान सौरभ साह, भानु कुमार, प्रीतम कुमार, राहुल रंजन और दीपक कुमार के रूप में हुई है। पुलिस ने इनकी निशानदेही पर हत्या में इस्तेमाल 1 पिस्टल, 3 जिंदा कारतूस और एक खोखा बरामद कर लिया है। सभी आरोपियों को न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया है।
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