दिल्ली की मुख्यमंत्री और शाहजहानाबाद रीडेवलपमेंट कॉरपोरेशन (SRDC) की अध्यक्ष रेखा गुप्ता (Rekha Gupta) की अध्यक्षता में एसआरडीसी की 38वीं बोर्ड बैठक आयोजित की गई। बैठक में पुरानी दिल्ली के समग्र विकास, विरासत संरक्षण और संबंधित परियोजनाओं पर विस्तार से चर्चा की गई। इसके अलावा, बैठक में पूर्व सरकार के कार्यकाल के दौरान एसआरडीसी की कार्यप्रणाली और वित्तीय मामलों में संभावित अनियमितताओं को भी उठाया गया। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने बैठक के दौरान स्पष्ट किया कि फाइनेंशियल अनियमितताओं की जांच कराई जाएगी और जो भी दोषी पाए जाएंगे, उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
MRDC का नाम बदला जाएगा
बैठक में दिल्ली सरकार के कैबिनेट मंत्री आशीष सूद सहित सभी संबंधित विभागों के वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित थे। बोर्ड का नाम परिवर्तन – नए नाम के लिए तीन प्रस्तावित विकल्प तैयार किए जाएंगे और वरीयता क्रम के आधार पर फाइनल नाम तय किया जाएगा। चांदनी चौक पुनर्विकास परियोजना – लाल जैन मंदिर से फतेहपुरी मस्जिद तक क्षेत्र की पुनर्विकास परियोजना की समीक्षा की गई। समग्र पुनर्गठन और पुनर्जीवन – मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा कि अब समय आ गया है कि बोर्ड का समग्र पुनर्गठन और पुनर्जीवन किया जाए। सरकार न केवल बोर्ड का नाम बदलेगी, बल्कि पुरानी दिल्ली और शाहजहानाबाद क्षेत्र के वास्तविक पुनर्विकास को भी गति देगी।
पुरानी दिल्ली का गौरव लौटाया जाएगा
दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने बताया कि पुरानी दिल्ली का पुराना गौरव वापस लाने के लिए दिल्ली सरकार ने गंभीर प्रयास शुरू कर दिए हैं। 28 सड़कों पर विकास कार्य – लगभग 160 करोड़ रुपये की लागत से सड़कों का निर्माण और सुधार किया जा रहा है। सौंदर्यीकरण और स्वच्छता – क्षेत्र के सौंदर्यीकरण के साथ स्वच्छता व्यवस्था को मजबूत किया जा रहा है। सार्वजनिक शौचालय और सफाई – शौचालयों का बेहतर रखरखाव और व्यापक सफाई अभियान चलाया जा रहा है। बिजली की भूमिगत वायरिंग – पूरे क्षेत्र में बिजली की वायरिंग को चरणबद्ध तरीके से भूमिगत किया जाएगा, ताकि पुरानी दिल्ली के ऐतिहासिक स्वरूप को सुरक्षित रखते हुए आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध कराई जा सकें।
हेरिटेज स्मारक के रूप में विकसित होगा टाउन हॉल
दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने बताया कि पुरानी दिल्ली का पुनर्विकास परियोजना में टाउन हॉल को भी महत्वपूर्ण हेरिटेज स्मारक के रूप में विकसित किया जाएगा। इससे क्षेत्र सांस्कृतिक और ऐतिहासिक दृष्टि से और अधिक आकर्षक बनेगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि पुरानी दिल्ली देश की राजधानी का दिल है और सरकार का लक्ष्य है कि इसकी ऐतिहासिक विरासत, पहचान और सांस्कृतिक गरिमा को संरक्षित रखते हुए आधुनिक सुविधाओं के साथ विकास किया जाए।
पूर्व सरकार की कार्यप्रणाली की जांच की जाएगी
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा कि 2018 में शुरू की गई एक परियोजना की लागत शुरुआत में लगभग 65 करोड़ रुपये बताई गई थी, लेकिन समय के साथ यह बढ़कर लगभग 148 करोड़ रुपये तक पहुँच गई। इसके अनुमोदन और प्रक्रियाओं के लिए गंभीर सवाल उठते हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि उपलब्ध दस्तावेजों से यह स्पष्ट होता है कि विकास कार्यों के नाम पर गंभीर अनियमितताएं और भ्रष्टाचार किया गया। उन्होंने यह भी कहा कि रिकॉर्ड में उस समय के बोर्ड के चेयरपर्सन और संबंधित पदाधिकारियों की भूमिका स्पष्ट रूप से दिखाई देती है, जिससे प्रतीत होता है कि प्रक्रियाओं को गलत तरीके से आगे बढ़ाया गया।
दिल्ली के शहरी विकास मंत्री आशीष सूद ने कहा कि पुरानी दिल्ली का विकास अब सुव्यवस्थित और रणनीतिक रूप से किया जाएगा। समीक्षा के दौरान कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए। मंत्री सूद ने बताया कि पिछली सरकार ने कई परियोजनाएं केवल दिखावे के लिए और बिना ठोस योजना के चलाईं। पुरानी दिल्ली, जिसे कभी ‘चारदीवारी वाला शहर’ (Walled City) कहा जाता था और जो दिल्ली की मूल आबादी का घर है, उसे पिछली सरकार के कार्यकाल में पर्याप्त विकास और संरक्षण नहीं मिला।
आशीष सूद ने कहा कि मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के नेतृत्व में, बोर्ड अब दिल्ली की सांस्कृतिक विरासत और पुरानी आबादी वाले क्षेत्रों को संरक्षित करने के लिए प्रतिबद्ध है। इसका उद्देश्य है कि क्षेत्र की ऐतिहासिक विरासत, स्थानीय पर्यावरण, भौगोलिक परिस्थितियां और जनसांख्यिकीय संरचना को ध्यान में रखते हुए व्यापक और सुव्यवस्थित विकास रणनीति तैयार की जाए। सूद ने यह भी कहा कि पिछली सरकार के दौरान बोर्ड का कामकाज अत्यंत कमजोर रहा और विकास के नाम पर संसाधनों की बर्बादी हुई थी। नई रणनीति के तहत अब पुरानी दिल्ली को सुरक्षित, आधुनिक सुविधाओं से लैस और ऐतिहासिक स्वरूप में संरक्षित किया जाएगा।
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