सरकार निगरानी व्यवस्था को और मजबूत बनाने के लिए CCTV कैमरा नेटवर्क को बड़े स्तर पर अपग्रेड करने की तैयारी कर रही है। इस योजना का उद्देश्य शहर में कैमरों का कवरेज बढ़ाना, निगरानी प्रणाली को आधुनिक बनाना और अपराध की रोकथाम में तकनीक की भूमिका को और प्रभावी बनाना है। योजना के तहत पहले चरण में करीब 50 हजार पुराने सीसीटीवी कैमरों को बदलने (रिप्लेस करने) की तैयारी की गई है। इन कैमरों की जगह नए और उन्नत तकनीक वाले कैमरे लगाए जाएंगे, जिससे बेहतर क्वालिटी की रिकॉर्डिंग और निगरानी संभव हो सकेगी।

सरकारी अधिकारियों के मुताबिक इस परियोजना को लागू करने से पहले एक विशेषज्ञ सलाहकार से विस्तृत अध्ययन कराया जाएगा। अध्ययन के जरिए यह आकलन किया जाएगा कि किन इलाकों में कैमरों की जरूरत ज्यादा है, मौजूदा नेटवर्क में क्या कमियां हैं और नई तकनीक को किस तरह से बेहतर तरीके से लागू किया जा सकता है।

PWD ने बनाया था प्लान

अधिकारियों के अनुसार Public Works Department (PWD) ने वर्ष 2018 में दो चरणों में 2.80 लाख CCTV कैमरे लगाने की योजना बनाई थी। पहले चरण में 1.40 लाख कैमरे लगाए गए थे, जबकि दूसरे चरण में भी 1.40 लाख कैमरे लगाए जाने थे। हालांकि दूसरे चरण में करीब 1.30 लाख कैमरे ही लगाए जा सके। PWD के मुताबिक पहले चरण में लगाए गए कई कैमरों की उम्र अब धीरे-धीरे पूरी हो रही है, इसलिए उन्हें नए और उन्नत कैमरों से बदला जाएगा। विभाग ने ऐसे करीब 50 हजार कैमरों की पहचान कर ली है, जिन्हें सबसे पहले बदला जाएगा।

PWD मंत्री Parvesh Sahib Singh के मुताबिक CCTV कैमरों की औसत उम्र करीब 5 से 7 साल होती है। पहले चरण में लगाए गए 1.40 लाख कैमरों में से 50 हजार से अधिक कैमरे अब अपनी तय उम्र पूरी कर चुके हैं। इनमें कई सिम-आधारित और चीनी कंपनी के कैमरे भी शामिल हैं। मंत्री ने बताया कि जिन 50 हजार कैमरों को बदला जाएगा, उनकी लोकेशन और कवरेज तय करने के लिए एक विशेषज्ञ सलाहकार नियुक्त किया जा रहा है। यह सलाहकार पूरे दिल्ली में मौजूद CCTV नेटवर्क का विस्तृत अध्ययन करेगा और बताएगा कि नए कैमरे किन जगहों पर लगाए जाएं, ताकि निगरानी व्यवस्था और अधिक प्रभावी बन सके।

उन्होंने कहा कि दिल्ली में कई जगह कैमरों का असमान वितरण है, जिसे अध्ययन के आधार पर ठीक किया जाएगा। फिलहाल Delhi Police, New Delhi Municipal Council (NDMC) और PWD समेत कई एजेंसियां अपने-अपने स्तर पर कैमरे लगाती हैं, जिससे कई जगह डुप्लीकेशन और कम उपयोग की समस्या सामने आती है।

अध्ययन में यह भी देखा जाएगा कि दिल्ली में लगे कैमरों से वास्तव में कितना फायदा हो रहा है। इसके आधार पर कैमरों के कवरेज एंगल में बदलाव भी किया जाएगा। जरूरत के अनुसार पुराने कैमरों को हटाकर उनकी जगह नए और उन्नत तकनीक वाले कैमरे लगाए जाएंगे।

30 दिन सुरक्षित रहता है डेटा

वर्तमान में दिल्ली में करीब 2.70 लाख CCTV कैमरे लगे हुए हैं और इनके संचालन के लिए एक बड़ा कंट्रोल रूम भी बनाया गया है। मौजूदा नेटवर्क के रखरखाव की जिम्मेदारी Bharat Electronics Limited (BEL) के पास है, जो केंद्र सरकार की सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी है। अधिकांश कैमरे नाइट विजन तकनीक से लैस हैं और इन्हें पोल या दीवारों पर लगाया गया है। इनकी रिकॉर्डिंग करीब 30 दिन तक सुरक्षित रखी जाती है, जिसका उपयोग PWD, पुलिस और अदालतें जरूरत पड़ने पर कर सकती हैं। ये कैमरे बाजारों, सड़कों, रिहायशी कॉलोनियों और व्यावसायिक केंद्रों जैसे सार्वजनिक स्थानों पर लगाए गए हैं, ताकि शहर में निगरानी व्यवस्था मजबूत रह सके।

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