राजकुमार पाण्डेय की कलम से
‘अदना’ ने बता दिया सूची हवा-हवाई
प्रमोशन और एसआईआर के कारण लंबे समय तक जिला स्तर के प्रशासनिक अफसरों से तबादले अटके रहे. अब जब लंबी सूची तैयार होने की चर्चा चल रही है तो एक अदना सा कर्मचारी बता देता है कि नाम चढ़ने लगे कि नहीं. सूची में नाम जुड़वाने के लिए एढ़ी-चोटी का जोर लगाए एक अफसर के साथ ऐसा ही वाक्या हो गया, जब अफसर महोदय को बताया गया कि सूची बनने लगी है. अफसर महोदय ने अपनी कुर्सी पर बैठे-बैठे अदने कर्मचारी से फोन पर चर्चा की और कर्मचारी ने बता दिया कि अभी ऐसा नहीं है. जिसने भी सूची की बात कही है, वह हवा-हवाई है.
विधायक फोन बंद करने की फिराक में
कुछ दिन पर्सनल मोबाइल बंद कर कहीं आराम फरमा आएं, बाद में जब पूछा जाए तो कह देना किसी उलझन में थे. विधायकजी को यह सलाह सलाहकार मंडल के सदस्यों की ओर से दी गई है. दरअसल नेताजी सलाहकार मंडल के साथ बैठे थे, तभी वहां राज्यसभा में सेंध की चर्चा छिड़ गई. विधायकजी ने पूछा कि क्या किया जाए तो एक ने सलाह दी कि मौके का फायदा उठा लिया जाए. कुछ दिन के लिए पर्सनल मोबाइल बंद दो और कहीं छुट्टियां बिता आओ. हलचल तो होगी ही, साथ ही पूछ परख भी बढ़ेगी. इस सलाह पर सबने रजामंदी भी कर दी. चर्चा है कि विधायकजी जल्द लंबी छुट्टी पर जा सकते हैं.
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‘सच में हम सब घूमने ही गए थे’
चोर की दाढ़ी में तिनका, कहावत तो खूब सुनी होगी. ऐसा ही एक वाक्या पार्टी के दौरान हुआ. जहां बड़े चेहरों के बीच बैठना हुआ तो दुबई दौरे की चर्चा छिड़ ही गई. बात आगे बढ़ती उससे पहले ही महाशय कह बैठे कि हम किसी बिजनेस डील के संबंध में नहीं गए थे. सच में हम दुबई घूमने ही गए थे. इतना सुनते ही जोर के ठहाके लग बैठे. महाशय ने फिर सफाई दी, लेकिन फिर ठहाके लग गए. एक सज्जन ने कहा कि अरे पूछ कौन रहा है कि किसलिए गए थे. हम तो वहां के हालात जानना चाह रहे थे.
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एसडीएम पहले फील्ड में रहती थीं
बात भोपाल संभाग की है. 10 से 6 तक की ऑफिशियल ड्यूटी की निगरानी हुई तो अब मजबूरन एसडीएम मैडम को समय पर आना पड़ रहा है. अब कार्यालय में चर्चा इस बात को लेकर होने लगी कि मैडम वक्त की बड़ी पाबंद हो गई हैं. चर्चा की कानाफूसी मैडम के कानों में भी पहुंची. एक दिन मैडम ने पूरे स्टाफ को बारी-बारी से बुलाकर स्पष्टीकरण दिया कि वो घर से तो सुबह 10 बजे से निकल जाती थीं. फील्ड पर अधिक फोकस होने के कारण कार्यालय देरी से आती थीं.
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