कुंदन कुमार/पटना। बिहार की 5 राज्यसभा सीटों के लिए सोमवार को हुई वोटिंग के बाद सूबे की सियासत गरमा गई है। एनडीए खेमे में जहां पूरी एकजुटता दिखी, वहीं महागठबंधन के कुनबे में बड़ी सेंधमारी ने विपक्ष की चिंताएं बढ़ा दी हैं। मतदान की समय सीमा खत्म होने तक महागठबंधन के 4 विधायक वोट डालने नहीं पहुंचे, जिसके बाद क्रॉस वोटिंग और दलबदल की चर्चाओं ने जोर पकड़ लिया है।
इन विधायकों ने बढ़ाई विपक्ष की धड़कनें
वोटिंग प्रक्रिया से गायब रहने वाले विधायकों में राजद (RJD) के ढाका विधायक फैसल रहमान का नाम सबसे आगे है। उनके अलावा कांग्रेस के तीन और विधायकों ने भी मतदान से दूरी बनाए रखी। इनमें मनोहर प्रसाद, सुरेंद्र कुशवाहा और मनोज विश्वास शामिल हैं। सूत्रों के अनुसार, पार्टी के शीर्ष नेता पूरे दिन इन विधायकों से संपर्क करने की कोशिश करते रहे, लेकिन सभी के फोन बंद पाए गए।
एनडीए के लिए फायदे का सौदा
राज्यसभा की 5 सीटों के लिए कुल 6 उम्मीदवार मैदान में हैं। एक उम्मीदवार को जीत सुनिश्चित करने के लिए 41 प्रथम वरीयता के वोटों की आवश्यकता थी। एनडीए के पास अपने 202 विधायकों का ठोस समर्थन है। हालांकि, विपक्ष के 4 विधायकों के अनुपस्थित रहने से अब जीत का कोटा गिरकर 40 पर आ सकता है। तेजस्वी यादव ने वोटिंग के बाद मीडिया से बात करते हुए संक्षिप्त प्रतिक्रिया दी- अभी गिनती जारी है, परिणामों का इंतजार करें।
देर रात तक आएंगे नतीजे
शाम 5 बजे से वोटों की गिनती शुरू हो चुकी है। महागठबंधन के लिए यह चुनाव एक बड़ी परीक्षा साबित हो रहा है, क्योंकि एआईएमआईएम (AIMIM) के 5 विधायकों और बसपा (BSP) के एकमात्र विधायक ने राजद उम्मीदवार के पक्ष में मतदान किया है, फिर भी अपने ही विधायकों की गैरमौजूदगी ने विपक्षी रणनीति को कमजोर कर दिया है। एनडीए की नजरें अब पांचों सीटों पर कब्जा जमाने पर टिकी हैं।
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