सोहराब आलम/ मोतिहारी। बिहार के मौसम में आए अचानक बदलाव ने जनजीवन को अस्त-व्यस्त कर दिया है। राज्य के 15 से अधिक जिलों में तेज आंधी के साथ भारी बारिश हुई है, जबकि 6 प्रमुख शहरों में जमकर ओले गिरे हैं। इस बेमौसम मार ने सबसे ज्यादा नुकसान किसानों को पहुंचाया है, जिनकी गेहूं की तैयार फसलें बर्बाद हो गई हैं।
प्रमुख जिलों में भारी तबाही
पटना, बेतिया, मोतिहारी, मुजफ्फरपुर, औरंगाबाद, और भागलपुर समेत कुल 15 शहरों में धूल भरी आंधी और बारिश ने जनजीवन की रफ्तार रोक दी। बगहा, मोतिहारी, बेगूसराय और खगड़िया में बड़े आकार के ओले गिरने की खबर है। औरंगाबाद में आंधी का वेग इतना अधिक था कि वहां मुख्यमंत्री की सभा के लिए लगाए गए पोस्टर और होर्डिंग्स तक फट गए। मोतिहारी में धूल के गुबार के कारण दृश्यता इतनी कम हो गई कि सड़कों पर वाहनों का चलना मुश्किल हो गया।
खगड़िया में तूफान के बीच इफ्तार
खगड़िया जिले में मौसम का मिजाज सबसे अलग नजर आया। यहां भीषण तूफान और बारिश के बीच भी लोगों का उत्साह कम नहीं हुआ और उसी माहौल में इफ्तार पार्टी का आयोजन किया गया। हालांकि, तेज हवाओं ने आयोजकों के लिए काफी मुश्किलें खड़ी कीं।
किसानों पर टूटा दुखों का पहाड़
इस प्राकृतिक आपदा की सबसे ज्यादा मार कृषि क्षेत्र पर पड़ी है। आंधी और ओलावृष्टि ने गेहूं की कटाई के लिए तैयार फसल को बिछा दिया है। ओलों की वजह से दाने झड़ गए हैं, जिससे किसानों को भारी आर्थिक क्षति होने की आशंका है।
रेड अलर्ट और मौसम का कारण
मौसम विभाग ने स्थिति की गंभीरता को देखते हुए दरभंगा, मधुबनी और समस्तीपुर के लिए रेड अलर्ट जारी किया है। वैज्ञानिकों के अनुसार, बंगाल की खाड़ी से आ रही नमी और एक सक्रिय ट्रफ लाइन के कारण यह बदलाव आया है। दिन की गर्मी और नमी मिलकर वातावरण में अस्थिरता पैदा कर रही हैं।
सावधान रहें, सुरक्षित रहें
विभाग ने चेतावनी दी है कि हवा की रफ्तार 60 किमी/घंटा तक जा सकती है। लोगों से अपील की गई है कि वे पेड़ों, बिजली के खंभों और कच्चे ढांचों से दूर रहें, क्योंकि इनके गिरने का खतरा बना हुआ है।
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