कुंदन कुमार/ पटना। बिहार की राजनीति में आज एक बड़ी हलचल देखने को मिली जब मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के पुत्र निशांत कुमार सक्रिय रूप से जनता दल यूनाइटेड (JDU) के प्रदेश कार्यालय पहुंचे। सार्वजनिक जीवन और राजनीति से प्रायः दूरी बनाए रखने वाले निशांत का पार्टी नेताओं और जिलाध्यक्षों के साथ दो घंटे तक संवाद करना सियासी गलियारों में चर्चा का विषय बन गया है।
पिता की नीतियों को जन-जन तक पहुंचाना लक्ष्य
बैठक के बाद मीडिया से मुखातिब होते हुए निशांत कुमार ने अपने इरादे साफ किए। उन्होंने कहा, मुख्य चर्चा इस बात पर हुई कि पिताजी (नीतीश कुमार) की जनकल्याणकारी नीतियों को समाज के अंतिम व्यक्ति तक कैसे पहुंचाया जाए और संगठन को जमीनी स्तर पर कैसे और अधिक मजबूत किया जाए। कार्यकर्ताओं के साथ उनकी इस मैराथन बैठक को पार्टी के भविष्य और संगठन में नई ऊर्जा फूंकने के तौर पर देखा जा रहा है।
इस्तीफे की प्रक्रिया और संवैधानिक स्थिति
दूसरी ओर, मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के इस्तीफे को लेकर चल रही अटकलों पर विधानसभा अध्यक्ष प्रेम कुमार ने स्थिति स्पष्ट की है। उन्होंने बताया कि संवैधानिक प्रावधानों के अनुसार, निर्वाचित होने के 14 दिनों के भीतर किसी एक सदन की सदस्यता से इस्तीफा देना अनिवार्य है। नीतीश कुमार को अपनी विधान परिषद (MLC) की सदस्यता छोड़नी होगी।
विधानसभा अध्यक्ष ने जोर देकर कहा कि:
- नीतीश कुमार को मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देने की आवश्यकता नहीं है।
- संविधान के अनुसार, कोई भी व्यक्ति बिना किसी सदन का सदस्य रहे भी 6 महीने तक मुख्यमंत्री रह सकता है।
- नितिन नवीन को भी 30 मार्च तक अपना इस्तीफा सौंपना होगा।
30 मार्च को पूरी होगी औपचारिकता
वर्तमान में बिहार विधानसभा और विधान परिषद में 29 मार्च तक अवकाश है। इसी कारण इस्तीफे की आधिकारिक प्रक्रिया 30 मार्च को संपन्न होने की उम्मीद है। स्पष्ट है कि नीतीश कुमार मुख्यमंत्री के रूप में अपना कार्यकाल जारी रखेंगे और फिलहाल सरकार पर कोई संवैधानिक संकट नहीं है।
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