पटना। नगर निगम ने शहर की खूबसूरती और विज्ञापन व्यवस्था को व्यवस्थित करने के लिए नई विज्ञापन नियमावली प्रभावी कर दी है। अब राजधानी में होर्डिंग, यूनिपोल या डिजिटल बोर्ड लगाने के लिए एजेंसियों को जोन के आधार पर तय दरों का भुगतान करना होगा। निगम का मुख्य उद्देश्य अवैध विज्ञापनों पर लगाम लगाना और राजस्व में पारदर्शिता लाना है।

​चार श्रेणियों में बंटा शहर

  • ​नई पॉलिसी के तहत पटना को ट्रैफिक, विजिबिलिटी और व्यावसायिक महत्व के आधार पर चार जोन (A, B, C और D) में विभाजित किया गया है:
  • ​जोन A (प्रीमियम/मीडियम जोन): इसमें शहर की 31 मुख्य सड़कें शामिल हैं। डाकबंगला चौराहा, बेली रोड, फ्रेजर रोड, गांधी मैदान और बोरिंग रोड जैसे इलाकों में दरें सबसे अधिक 90 से 150 रुपये प्रति वर्ग फुट तय की गई हैं।
  • ​जोन B और C: इन श्रेणियों में क्रमशः आवासीय-सह-व्यावसायिक सड़कें और अन्य सामान्य मोहल्लों को रखा गया है।
  • ​जोन D (सर्वाधिक महंगा): इस जोन में शहर के 14 गोलंबर और 11 इंटरसेक्शन शामिल हैं। दिलचस्प बात यह है कि जोन D का शुल्क जोन A की तुलना में दोगुना होगा, क्योंकि यहां विज्ञापन की विजिबिलिटी सबसे ज्यादा होती है।

​कड़े नियम: बिना लाइसेंस विज्ञापन पर लगेगा भारी जुर्माना

​नगर निगम ने स्पष्ट कर दिया है कि बिना वैध लाइसेंस के कोई भी एजेंसी विज्ञापन नहीं लगा पाएगी। नियमों के उल्लंघन पर न केवल भारी जुर्माना लगेगा, बल्कि बार-बार गलती करने वाली एजेंसियों को ब्लैकलिस्ट भी किया जाएगा। विज्ञापन संरचना की मजबूती, सुरक्षा और स्वच्छता बनाए रखने की पूरी जिम्मेदारी संबंधित एजेंसी की होगी।

​रजिस्ट्रेशन और रिनुअल शुल्क का ढांचा

  • ​एजेंसियों को निगम के साथ पंजीकृत होना अनिवार्य है। इसके लिए शुल्क ढांचा इस प्रकार है:
  • ​नया रजिस्ट्रेशन: 1.5 लाख रुपये।
  • ​रिनुअल (नवीनीकरण): 60 हजार रुपये।
  • ​सुरक्षा मानक: हर होर्डिंग के लिए तकनीकी मानकों का पालन और अलग से अनुमति लेना अनिवार्य होगा।