पटना। राज्यसभा चुनाव के दौरान पार्टी लाइन से हटकर काम करने और हॉर्स ट्रेडिंग के आरोपों में घिरे कांग्रेस के तीन विधायकों की किस्मत का फैसला अब दिल्ली दरबार में होगा। प्रदेश कांग्रेस अनुशासन समिति ने अपनी जांच पूरी कर ली है और आरोपी विधायकों सुरेंद्र प्रसाद कुशवाहा, मनोज विश्वास और मनोहर प्रसाद सिंह के खिलाफ सख्त कार्रवाई की अनुशंसा आलाकमान को भेज दी है।
अनुशासन समिति की कार्रवाई और अनुशंसा
प्रदेश कांग्रेस की अनुशासन समिति के प्रमुख कपिलदेव यादव ने आधिकारिक पुष्टि करते हुए बताया कि इन विधायकों को पहले कारण बताओ नोटिस जारी किया गया था। विधायकों ने अपने जवाब दाखिल किए हैं, जिन्हें पार्टी संविधान के अनुसार समीक्षा के बाद राष्ट्रीय महासचिव (संगठन) केसी वेणुगोपाल और प्रदेश प्रभारी कृष्णा अल्लावरू को भेज दिया गया है। अब अंतिम फैसला केंद्रीय नेतृत्व के विवेक पर निर्भर है।
क्या है पूरा विवाद?
मामला पिछले राज्यसभा चुनाव से जुड़ा है, जहां ये तीनों विधायक मतदान की प्रक्रिया से अनुपस्थित रहे थे। उनकी इस अनुपस्थिति के कारण महागठबंधन के प्रत्याशी अमरेंद्र धारी सिंह को हार का सामना करना पड़ा। पार्टी का मानना है कि यह रणनीतिक चूक नहीं बल्कि सोची-समझी हॉर्स ट्रेडिंग का हिस्सा थी।
विधायकों का अड़ियल रुख
हैरानी की बात यह है कि आरोपी विधायकों ने अपनी गलती मानने के बजाय प्रदेश नेतृत्व पर ही सवाल खड़े कर दिए। मीडिया में दिए बयानों और अनुशासन समिति को भेजे गए जवाबों में उन्होंने साफ तौर पर कहा कि प्रदेश कांग्रेस की ढुलमुल नीतियां ही इस स्थिति के लिए जिम्मेदार हैं।
कांग्रेस की वर्तमान स्थिति
आरोपी विधायकों में सुरेंद्र कुशवाहा (वाल्मीकिनगर), मनोज विश्वास (फारबिसगंज) और मनोहर प्रसाद सिंह (मनिहारी) शामिल हैं। गौरतलब है कि 2025 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के मात्र 6 विधायक ही जीतकर सदन पहुंचे थे, जिनमें से आधे विधायकों पर अब निष्कासन या निलंबन की तलवार लटक रही है। पार्टी के भीतर इस गुटबाजी ने संगठन की मजबूती पर गंभीर सवालिया निशान लगा दिए हैं।
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