दिल्ली विधान सभा सचिवालय ने ‘दिल्ली में शराब के विनियमन एवं आपूर्ति पर CAG की कार्यनिष्पादन ऑडिट रिपोर्ट’ पर लोक लेखा समिति (PAC) की दूसरी रिपोर्ट के सदन द्वारा अनुमोदित होने के बाद, संबंधित विभागों को निर्देश दिए हैं कि वे समिति की सिफारिशों की विस्तृत समीक्षा करें.  31 दिसंबर 2026 तक की स्थिति के अनुसार कार्यवाही प्रतिवेदन (Action Taken Report) तैयार करें. यह प्रतिवेदन अधिकतम 31 जनवरी 2027 तक सदन में प्रस्तुत किया जाना अनिवार्य है.

विधानसभा अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता ने कहा कि आबकारी व्यवस्था में मौजूद प्रणालीगत कमियों को देखते हुए, लोक लेखा समिति की सिफारिशों पर समयबद्ध और प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित करना बहुत जरूरी है। उन्होंने बताया कि इस मामले में दिल्ली सरकार के आबकारी मंत्री और प्रधान सचिव (वित्त) को पत्र भेजकर इन निर्देशों की जानकारी दी गई है। पत्र में उनसे समिति की सिफारिशों पर पूरी और समय पर प्रतिक्रिया देने को कहा गया है, ताकि विभाग स्तर पर आगे की कार्रवाई शीघ्र शुरू की जा सके।

समिति की सिफारिशें केवल कागजों तक सीमित न रहें

यह निर्देश अगली प्रक्रिया की शुरुआत को स्पष्ट रूप से दर्शाता है। इसमें कार्यपालिका की जिम्मेदारी तय की गई है कि वह सदन द्वारा स्वीकार किए गए निष्कर्षों पर निर्धारित समय-सीमा के भीतर जवाब दे। इस पहल का उद्देश्य है कि लोक लेखा समिति की सिफारिशें केवल कागज तक सीमित न रहें, बल्कि उन पर ठोस कार्रवाई हो और उनके स्पष्ट परिणाम दिखाई दें। यह कदम पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

विधानसभा अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता ने बताया कि लोक लेखा समिति (PAC) की रिपोर्ट में आबकारी विभाग की कार्यप्रणाली में कई गंभीर खामियां सामने आई हैं। रिपोर्ट के अनुसार कमियां इन क्षेत्रों में पाई गईं नियमों के पालन में लापरवाही, लाइसेंस जारी करने की प्रक्रिया, शराब की कीमत तय करने में गड़बड़ी, गुणवत्ता जांच में कमी, कार्रवाई और नीतियों के प्रभावी क्रियान्वयन में कमजोरी इन खामियों के चलते करीब ₹2,026.91 करोड़ का राजस्व नुकसान हुआ। साथ ही, इससे जनस्वास्थ्य और प्रशासनिक व्यवस्था पर नकारात्मक प्रभाव पड़ने की आशंका भी जताई गई है।

विधानसभा अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता ने यह भी बताया कि आबकारी व्यवस्था में तकनीकी सिस्टम की कमजोरियां भी सामने आई हैं। ESCIMS (Excise Supply Chain Information Management System) प्रणाली ‘स्टॉक टेक सोल्ड’ तरीके पर ज्यादा निर्भर रही, जिससे शराब की वास्तविक बिक्री का सटीक ट्रैक नहीं हो पाया। बड़ी संख्या में बिना दर्ज बारकोड होने के कारण भी निगरानी प्रणाली कमजोर पड़ी, जिससे राजस्व नुकसान की संभावना बढ़ी। वहीं, EIB (Excise Intelligence Branch) मॉड्यूल का उपयोग खुफिया जानकारी जुटाने में प्रभावी ढंग से नहीं किया गया और यह लगभग निष्क्रिय ही रहा।

उन्होंने बताया कि कई मामलों में आवश्यक अभिलेख (रिकॉर्ड) प्रस्तुत नहीं किए गए कुछ इकाइयों को एकाधिक लाइसेंस जारी कर दिए गए, जो नियमों के खिलाफ है इसके अलावा, एक्स-डिस्टिलरी मूल्य (EDP) और एक्स-ब्रुअरी मूल्य (EBP) की परिभाषा और विनियमन में अस्पष्टता पाई गई। इसके कारण विवेकाधीन (मनमाने) तरीके से कीमत तय की गई. लाइसेंसधारकों को अनुचित लाभ मिला अत्यधिक मुनाफाखोरी (ज्यादा लाभांश) की स्थिति बनी.

 ‘प्रभावी कदम नहीं उठाए गए’

उन्होंने कहा कि सीमित स्रोत नीति और मांग का सही अनुमान न लग पाना बड़ी वजह रही विभागों के बीच समन्वय की कमी से स्थिति और बिगड़ी प्रवर्तन एजेंसियां जब्ती के आंकड़ों का सही उपयोग नहीं कर पाईं परमिट के दुरुपयोग पर समय पर कार्रवाई नहीं हुई चिन्हित संवेदनशील स्थानों पर भी प्रभावी कदम नहीं उठाए गए  लोक लेखा समिति (PAC) ने व्यवस्था सुधारने के लिए कई अहम सुझाव दिए हैं ई-अबकारी पोर्टल को जल्द लागू करना शराब की निगरानी के लिए मजबूत “ट्रैक एंड ट्रेस” सिस्टम विकसित करना बारकोड स्कैनिंग और जियो-टैगिंग को बेहतर बनाना पूरी आईटी प्रणाली को सशक्त और आधुनिक करना.

इसके साथ ही, एग्जिट प्लान तैयार करना, ताकि नीति में बदलाव के दौरान अव्यवस्था न हो आईटी पदों की खाली जगहों को भरना, जिससे तकनीकी सिस्टम मजबूत हो लाइसेंस प्रक्रिया की सख्त जांच और हर तीन महीने में नियमित निगरानी सभी मामलों में जरूरी दस्तावेजों की अनिवार्यता सुनिश्चित करना कीमत तय करने की स्पष्ट और पारदर्शी व्यवस्था बनाना, जिसमें न्यूनतम EDP (Ex-Distillery Price) तय करना भी शामिल है . समिति ने यह भी सिफारिश की है कि मुनाफे को नियंत्रित किया जाए पिछली गड़बड़ियों के लिए जिम्मेदारी तय की जाए. डेटा आधारित सख्त कार्रवाई की जाए. पूरी व्यवस्था में पारदर्शिता और दक्षता बढ़ाई जाए.

Follow the LALLURAM.COM MP channel on WhatsApp
https://whatsapp.com/channel/0029Va6fzuULSmbeNxuA9j0m