हिंदू पंचांग का दूसरा महीना वैशाख इस समय चल रहा है, जिसे माधव मास भी कहा जाता है. इसी महीने से त्रेता युग की शुरुआत हुई थी. शास्त्रों में वैशाख मास को सभी महीनों में श्रेष्ठ बताया गया है. जैसे विद्याओं में वेद और वृक्षों में कल्पवृक्ष का महत्व है, उसी प्रकार महीनों में वैशाख को सर्वोत्तम माना गया है. इस वर्ष यह मास 3 अप्रैल से 1 मई तक रहेगा.

जल दान का विशेष महत्व
इसी माह में खरमास समाप्त होता है. जिसके बाद विवाह सहित अन्य मांगलिक कार्यों के शुभ मुहूर्त शुरू हो जाते हैं. पुराणों में वैशाख मास में जल दान को सबसे महत्वपूर्ण बताया गया है. राहगीरों के लिए प्याऊ लगवाना पुण्य दायी माना जाता है, जिससे सभी तीर्थों के दर्शन के समान फल प्राप्त होता है.
भगवान विष्णु की पूजा
वैशाख में सूर्योदय से पहले पवित्र नदी या सरोवर में स्नान करना उत्तम माना गया है. यदि यह संभव न हो तो घर पर स्नान के जल में गंगाजल मिलाकर स्नान किया जा सकता है. इस माह में पितरों के लिए तर्पण करना भी बहुत श्रेष्ठ होता है. भगवान विष्णु की पूजा में पंचामृत का भोग लगाया जाता है. उसमें तुलसी का पत्ता डालना जरूरी माना गया है. रोज सुबह-शाम तुलसी के पास घी का दीपक जलाने और जल अर्पित करने की परंपरा भी निभाई जाती है.
इस महीने खानपान पर ध्यान रखना जरूरी है
यह महीना भगवान विष्णु को समर्पित माना जाता है. पूरे मास में उनकी विशेष पूजा का विधान बताया गया है. मान्यता है कि इस दौरान विधि-विधान से उपासना करने पर विशेष पुण्य फल की प्राप्ति होती है. साथ ही गर्मी के मौसम को देखते हुए खान-पान और दिनचर्या का ध्यान रखना भी जरूरी होता है.
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