पटना। बिहार की सियासत में एक बड़े बदलाव की पटकथा लिखी जा चुकी है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के इस्तीफे और नई सरकार के गठन को लेकर चल रही अटकलों के बीच अब पूरी प्रक्रिया की संभावित टाइमलाइन सामने आ गई है। सूत्रों की मानें तो राज्य की राजनीति में अगले एक हफ्ते के भीतर सत्ता का स्वरूप पूरी तरह बदल जाएगा।

​दिल्ली दौरा और इस्तीफे की रणनीति

​बिहार सरकार के वरिष्ठ मंत्री विजय चौधरी ने इन चर्चाओं को बल देते हुए बताया कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार 9 अप्रैल को दिल्ली के लिए रवाना होंगे। विजय चौधरी के अनुसार, राज्यसभा सदस्य मनोनीत होने के बाद नीतीश कुमार मुख्यमंत्री पद का त्याग कर देंगे। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि इस्तीफे के लिए कैबिनेट की औपचारिक बैठक की बाध्यता नहीं है; मुख्यमंत्री सीधे राज्यपाल को अपना त्यागपत्र सौंप सकते हैं। उन्होंने संकेत दिया कि नई सरकार का गठन किसी ‘शुभ मुहूर्त’ में ही संपन्न होगा।

​सत्ता परिवर्तन की महत्वपूर्ण तारीखें

​बिहार के सियासी घटनाक्रम को लेकर जो टाइमलाइन उभर कर आई है, वह कुछ इस प्रकार है:

  • ​13 अप्रैल (अंतिम कैबिनेट): मौजूदा सरकार की आखिरी कैबिनेट बैठक इस दिन संभावित है। इसमें कई बड़े नीतिगत फैसले लिए जा सकते हैं और सरकार के कामकाज की समीक्षा होगी।
  • ​14 अप्रैल (इस्तीफा): सूत्रों का दावा है कि अंबेडकर जयंती के दिन नीतीश कुमार मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे सकते हैं, जिससे नई सरकार के गठन का मार्ग प्रशस्त होगा।
  • ​15 अप्रैल (शपथ ग्रहण): बिहार को इस दिन नया मुख्यमंत्री मिल सकता है। पटना के ऐतिहासिक गांधी मैदान में शपथ ग्रहण समारोह को भव्य रूप देने की तैयारियां अभी से शुरू हो चुकी हैं।

​सम्राट चौधरी: सीएम रेस में सबसे आगे

​एनडीए के भीतर चल रही हलचलों के अनुसार, सम्राट चौधरी को मुख्यमंत्री पद का सबसे प्रबल दावेदार माना जा रहा है। बीजेपी के भीतर उनके नाम पर लगभग सहमति बन चुकी है। अपनी आक्रामक कार्यशैली और मजबूत सामाजिक समीकरणों के कारण सम्राट चौधरी पार्टी की पहली पसंद बने हुए हैं। राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि बीजेपी अब बिहार में एक सक्रिय और नए चेहरे के जरिए अपनी पकड़ मजबूत करना चाहती है।

​युवा नेतृत्व और नए समीकरण

​इस बदलाव में एक नया आयाम निशांत कुमार (नीतीश कुमार के पुत्र) की सक्रियता को लेकर भी है। राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि भविष्य में सम्राट चौधरी और निशांत कुमार की ‘ट्यूनिंग’ बिहार की राजनीति में युवा नेतृत्व की एक नई जोड़ी पेश कर सकती है। यदि यह समीकरण सफल रहता है, तो बिहार की राजनीति में एक नए युग की शुरुआत होगी। फिलहाल, पूरे प्रदेश की नजरें राजभवन और पटना की गलियों में चल रही हलचलों पर टिकी हैं।