दिल्ली के द्वारका के ‘हैप्पी होम’ पर जब पुलिस ने एक जानकारी के बाद रेड की तो वह दंग रह गई. वहां पुलिस को होनहार छात्रों का पूरा ग्रुप मिला, जो किसी और का एग्जाम देने पहुंचा हुआ था. पुलिस को मौके पर कुल 32 छात्र मिले, जिन्होंने पूछताछ में पुलिस को बताया कि वो इसलिए आए हैं कि उन्हें ऑनलाइन परीक्षा देनी है. जब पुलिस ने एडमिट कार्ड की जांच की तो पता लगा कि 32 में से किसी को खुद परीक्षा नहीं देनी है, बल्कि ये सभी किसी और छात्र की जगह परीक्षा देने वाले हैं. इस खेल का मास्टरमाइंड हर्षवर्धन नाम का 28 साल का युवक था.

पूछताछ में हर्षवर्धन ने खुलासा किया कि वह मुंबई के एक प्रतिष्ठित मैनेजमेंट संस्थान की प्रवेश परीक्षाओं में बैठने के लिए उम्मीदवारों की व्यवस्था करता था. उसने आगे बताया कि परीक्षा जयपुर के एक आईटी लैब में आयोजित होनी थी. वह AnyDesk और Ammy Admin जैसे रिमोट एक्सेस सॉफ्टवेयर के माध्यम से उस लैब के कंप्यूटर सिस्टम को एक्सेस करता था.

32 छात्र पेपर सॉल्वर बनकर आए थे

जांच में पुलिस को पता लगा कि जो 32 छात्र पेपर सॉल्वर के तौर पर आए थे, उनमें कुछ को अंदाजा तक नहीं था कि वो किसी और की जगह एग्जाम में शामिल हो रहे हैं और पेपर सॉल्वर हैं, जबकि कुछ छात्र ऐसे भी थे जो पहले आ चुके थे और उन्हें पता था कि वो क्या करने वाले हैं?

छात्रों को कितने रुपए मिलते थे?

एक प्रश्न का छात्रों को 500 रुपए से लेकर 1000 रुपए तक मिलता था. हर्षवर्धन ने यह भी बताया कि 7 अप्रैल को उम्मीदवारों को परीक्षा में शामिल होना था और उनके एडमिट कार्ड उसके पास मौजूद थे. इस मामले में पुलिस ने एफआईआर दर्ज कर ली है, जबकि परीक्षा देने आए छात्रों को बाउंड डाउन किया गया है. पुलिस के मुताबिक ये एक ऑर्गनाइज रैकेट है, जो ऑनलाइन परीक्षा में रिमोट के द्वारा कंप्यूटर का एक्सेस लेता था और चीटिंग करवाता था.

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