हरियाणा में हरियाणा की मंडियों में जैसे ही गेहूं की आवक शुरू हुई, वैसे ही खरीद प्रक्रिया को लेकर सियासत भी तेज हो गई है। सरकार, विपक्ष और किसान संगठनों के बीच नई खरीद शर्तों को लेकर टकराव बढ़ गया है और इसी मुद्दे पर आज प्रदेशभर में किसान सड़कों पर उतरने की तैयारी में हैं।
कृष्ण कुमार सैनी , चंडीगढ़। हरियाणा में हरियाणा की मंडियों में जैसे ही गेहूं की आवक शुरू हुई, वैसे ही खरीद प्रक्रिया को लेकर सियासत भी तेज हो गई है। सरकार, विपक्ष और किसान संगठनों के बीच नई खरीद शर्तों को लेकर टकराव बढ़ गया है और इसी मुद्दे पर आज प्रदेशभर में किसान सड़कों पर उतरने की तैयारी में हैं।
प्रदेश की मंडियों में गेहूं खरीद व्यवस्था को लेकर सरकार का दावा है कि नई शर्तों से पारदर्शिता और सिस्टम में सुधार आया है। वहीं विपक्ष का आरोप है कि यही शर्तें किसानों के लिए परेशानी का कारण बन रही हैं और फसल बेचने में उन्हें भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
सरकार ने कहा विपक्ष किसानों को कर रहे भ्रमित
सरकार का कहना है कि विपक्ष किसानों को भ्रमित करने की कोशिश कर रहा है। अधिकारियों के अनुसार खरीद प्रक्रिया को बेहतर बनाने के लिए कई स्तरों पर व्यवस्था की गई है—हर मंडी में नोडल अधिकारी नियुक्त हैं, वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी जिलों की निगरानी कर रहे हैं और मंत्री व विधायक लगातार मंडियों का दौरा कर रहे हैं। सरकार का दावा है कि किसान की फसल का “एक-एक दाना” खरीदा जाएगा और किसी को परेशानी नहीं होने दी जाएगी।
कठोर शर्तों के कारण किसान हो रहे परेशान
इसके उलट कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों का कहना है कि सरकार ने कई “कठोर शर्तें” लागू कर दी हैं, जिनसे किसानों पर अतिरिक्त बोझ बढ़ गया है। विपक्ष के अनुसार बायोमेट्रिक सत्यापन, पोर्टल रजिस्ट्रेशन, गेट पास, गारंटर और ट्रैक्टर नंबर वेरिफिकेशन जैसी प्रक्रियाएं किसानों के लिए फसल बेचने में बाधा बन रही हैं।
पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने भी सरकार पर निशाना साधते हुए कहा है कि मंडियों में अव्यवस्था के कारण किसानों को लंबा इंतजार करना पड़ रहा है और उनकी सुनवाई नहीं हो रही है।
किसान संगठनों ने कहा- सरकार नई शर्तें हटाए
इसी बीच किसान संगठनों ने भी आंदोलन का ऐलान कर दिया है। संयुक्त किसान मोर्चा, भारतीय किसान यूनियन और अन्य स्थानीय संगठनों ने मिलकर आज प्रदेशव्यापी प्रदर्शन की तैयारी की है। इन संगठनों का कहना है कि सरकार की नई शर्तें हटाई जाएं, ताकि किसानों को अपनी फसल बेचने में राहत मिल सके।
किसानों के प्रदर्शन को देखते हुए प्रशासन भी अलर्ट पर है। पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों ने कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए तैयारियां तेज कर दी हैं और प्रदेशभर में निगरानी बढ़ा दी गई है।
गेहूं खरीद को लेकर यह विवाद अब सिर्फ प्रशासनिक मुद्दा नहीं रहा, बल्कि पूरी तरह राजनीतिक और आंदोलन का रूप ले चुका है। एक तरफ सरकार व्यवस्था सुधारने का दावा कर रही है, तो दूसरी तरफ विपक्ष और किसान संगठन इसे किसानों पर अतिरिक्त दबाव बता रहे हैं।
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