इस्लामाबाद में ईरान और अमेरिका के बीच शांति वार्ता की कोशिशों के बीच सरकार ने डीजल के निर्यात पर शुल्क 21.5 रुपये प्रति लीटर से बढ़ाकर 55.5 रुपये प्रति लीटर कर दिया है. इसके साथ ही एटीएफ (एविएशन टर्बाइन फ्यूल) पर शुल्क 29.5 रुपये प्रति लीटर से बढ़ाकर 42 रुपये प्रति लीटर कर दिया गया है. ताजा रिपोर्ट के मुताबिक मध्यपूर्व एशिया में जारी अनिश्चितता की वजह से 09 अप्रैल, 2026 को कच्चे तेल (भारतीय बास्केट) की कीमत US$ 120.28/बैरल के ऊंचे स्तर पर बनी रही. सरकारी आकड़ों के मुताबिक, युद्ध शुरू होने से पहले फरवरी, 2026 में कच्चे तेल (भारतीय बास्केट) की औसत कीमत 69.01 अमेरिकी डॉलर प्रति बैरल थी.
प्रमुख विवरण:
- डीजल पर निर्यात शुल्क: ₹21.5/L से बढ़ाकर ₹55.5/L।
- एटीएफ (ATF) पर शुल्क: ₹29.5/L से बढ़ाकर ₹42/L।
- उद्देश्य: घरेलू स्तर पर ईंधन की उपलब्धता बनाए रखना और निजी रिफाइनरियों द्वारा भारी मुनाफे पर लगाम लगाना।
- पेट्रोल: पेट्रोल के निर्यात पर शून्य (Nil) शुल्क बरकरार है।
X +7
यह फैसला वैश्विक बाजार में तेल की अस्थिरता और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों के बीच लिया गया है।
यानी, मध्यपूर्व युद्ध एशिया में जारी अनिश्चितता की वजह से कच्चा तेल फरवरी, 2026 की औसत कीमत के मुकाबले 09 अप्रैल, 2026 को 51.27 डॉलर प्रति बैरल महंगा हुआ, यानि 74.29% की बड़ी बढ़ोतरी. मार्च, 2026 महीने के दौरान भी कच्चे तेल की औसत कीमत 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर बनी रही थी. भारत अपनी जरुरत का 85% से ज़्यादा कच्चा तेल अंतर्राष्ट्रीय बाज़ार से आयात करता है. ऐसे में कच्चे तेल के और महंगा होने से तेल आयात का खर्च बढ़ता जा रहा है.
Follow the LALLURAM.COM MP channel on WhatsApp
https://whatsapp.com/channel/0029Va6fzuULSmbeNxuA9j0m
- छत्तीसगढ़ की खबरें पढ़ने यहां क्लिक करें
- उत्तर प्रदेश की खबरें पढ़ने यहां क्लिक करें
- लल्लूराम डॉट कॉम की खबरें English में पढ़ने यहां क्लिक करें
- खेल की खबरें पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें
- मनोरंजन की बड़ी खबरें पढ़ने के लिए करें क्लिक

